याद है तुम्हें, 
हमारा पहला स्पर्श !
जब बाबा  ;-
मेरा हाथ-तुम्हारे हाथों में दिये थे।

क्या बस हाथों को सौंपा-भर था ? 
नहीं-ना!
मानती हूँ;
तुम्हारे लिए मैं पहली स्त्री नहीं थी 
यह तुम्हें पता था !

परन्तु ,
वो..
स्मृति, 
छुअन , 
एहसास औऱ
देहों का संयुक्त होना 
सब प्रथम था...
मेरे लिए;।
हैं,,, ना !
               रत्नप्रिया