अपनों का सुख और दुख 
अपना ही होता है 
क्योंकि अपने हमेशा अपने होते है 
कोई फर्क नहीं दूर हो या पास 
वो प्यार से फ़ैली बाहें 
बड़ों के आशिर्वाद का एहसास दिलाती 
और याद दिलाती छोटे का लाड़ से लिपटना 
फिर कितने भी पास या दूर 
उनके होठो से निकले
वो मिश्री से शब्द पता है 
दिल से ही निकले थे 
पुचकार जाते दुलार जाते अब भी 
फिर कितने भी पास हो या दूर 
याद आते ही आ जाती है आँखों में चमक 
चाहे रात हो या दिन 
याद आते ही 
एक हूक सी भर जाती  दिल में 
सब कुछ धूम जाता इन ऑखो मे 
फिर अपने कितने भी पास हो या दूर 
कोई फर्क नहीं पड़ता 
अपनों का सुख और दुख अपना ही होता है 



                       अंजू