पिया  हम के दिया देईं, एक गो मोबाइलिया ना,
रउवां के हम आज  मनाईला ना।

पिया बजारे जइह,एक गो नीक के मोबइलिया ले अइह।
वोह के रखे खातिन सुन्नर के थइलिया ना। रउवा के,,,,,

पिया मोबलिया ले आ द, वोहमें जियो के सिम डरवा द।
ओकर नेटवरकवा ,कुल ओरियां जाई,ना। रउवा के,,,,,, 

रिचारज करावे जइह त, ढेर दिन वाला करइह।
बेफिकर होके माई,बहिनी से बतियाइब ना। रउवा के,,,,,

तनी रउवा सिखाइ देइब, ओकरे बाद अपनिए से सीखब।
हरदम पूछत के रउवा से,हम लजाइब ना। रउवा के,,,,

पहिले फोनवा लगावे के सीखब,सबके फोन नम्बरवा लीखब।
रउवा लगे अफिसवा में,रोज फोनवा मिलाइब ना। रउवा के,,,

औरो फोटउवा खींचे सीखब,सब दिनवा ढेर के खींचब।
ओके सगरो सखी,सहेलियन के देखाइब ना। हमनी के,,

,जब तनी औरो सीख जाइब,त सेल्फिया के अजमाइब।
सेलफी हींच हींच के, ढेर के हंसब ,मुस्काइब ना। रउवां के,,,

एगो सखी हमरे कहलिन, वू भटसैपवा,फेसबुकवा पर बाटिन।
हमहूं लोगवा के  आपन गुन,ढंग बताइब ना।रउवा के,,,,,,

तनी औरौ सीख जाइब,एक गो  विडियोउवा बनाइब।
सबके लगे भेज के इतराइब ना। रउरा के,,,,,

ओहमें औरो कुछ होई,कछु सिखि पाइब कछु नाही।
जौन सीखि पाइब, ओही से काम चलाइब ना। रउवां के,,,

जब इ चलावे के आइ जाइ,एक ठो काम बढ़ि जाई।
कब्बो कब्बो जरि जाई,सगरो तरकारी ना।रउवा के,,,,,,

दुधवा फफा फफा के के गिरि जाई,त रउवा गुस्साइब।
आपन म़ुहवां बन्द कइके, मुस्कियाइब ना। रउवा के,,,,,

                   स्नेहलता पाण्डेय
                          नई दिल्ली