आज सिमरन का फिर से अपने पति से जोरदार झगड़ाहुआ ।वजह वही मोबाइल, जब भी सिमरन का मोबाइल उसके पति अनुराग के हाथ पड़ता है ,उसे उसमें सिमरन से लड़ने की वजह मिल ही जाती है।  ऐसा नहीं है कि इसके पहले किसी अन्य वजह से उनके बीच झगड़े नहीं हुए ,बहुत हुए  ।उनके बीच बहुत सी वजह होती हैं मनमुटाव की, पर आजकल सिर्फ एक ही वजह पर फोकस है मोबाइल।अनुराग ने  मोबाइल सिमरन के हाथ में देखा और उसका पारा चढ़ा। फिर शुरू उसका मोबाइल पुराण,पागल औरत पता नहीं हैं इसको जमाना कितना खराब है ।लोग कैसे कैसे बेबकूफ बनाते हैं । किस तरह औरतों को फँसाते हैं।आजकल इसके चक्कर में कितने हादसे हो रहे हैं ,किस तरह लोगों की जिंदगी खराब हो रही है।पर इसको तो दिमाग ही नहीं है। बस अपनी ही धुन में मग्न रहती है। देखना किसी दिन लेने के देने पड़ जाएंगे ,तब समझ आएगा इसको आदि------।
ऐसा नहीं है कि मोबाइल सिमरन ने खुद से खरीदा हो। वो तो अनुराग ने ही लाकर दिया । उसने ही फेसबुक ,व्हाट्सएप पर उसका अकाउंट बनाया ,पर उसे ये पसन्द नहीं कि किसी भी अनजान की पोस्ट पर कमेंट्स किया जाए ,बस यही है दोनों के बीच की झगड़े की वजह। सिमरन का मानना है कि हम किसी व्यक्ति से तो कुछ नहीं कह रहे हैं ,अरे उसकी बात हमें अच्छी लगी तो कर दिया कमेंट्स। उसमें क्या , यही वजह है आज के झगड़े की। अपने पति की बातों से उसकी आँखों में अश्रुधारा बहने लगी। अंदर से मन बहुत दुखी हो गया , उसने निश्चय कर लिया कि अब वो मोबाइल नहीं चलाएगी। वैसे भी उसे मोबाइल से कोई खास प्रेम न था। न्यूजपेपर में वो भी आये दिन सोशल नेटवर्किंग के कारण हुई दुर्घटनाओं के बारे में पढ़ती रहती थी तो अंदर से डर उसे भी लगता था । हाल ही में उसके जीवन में एक दुखद घटना घटित हुई , उसकी मां का देहांत हो गया । जिस कारण उसका मन बड़ा विचलित रहता हैं । अंदर ही अंदर वो बड़ी उथलपुथल की शिकार है। धीरे - धीरे वो मानसिक अवसाद की शिकार होती जा रही थी।जिसकी भनक खुद उसको भी न थी ,फिर पतिदेव तो पतिदेब ठहरे,वो कैसे समझ सकते थे ये बात। अनुराग की एक अलग ही दुनिया है जिसमें सिर्फ वो है , उसकी परेशानी , उसका व्यवसाय ,उसकी खुशियां, उसके दुख, उसकी पसन्द नापसन्द ,जो भी है सिर्फ उसका ही है, उसकी दुनिया में किसी और के लिए कोई जगह नहीं  है। उसे सिमरन के सुख - दुख से ज्यादा मतलब न रहता, रहता तो सिर्फ इस बात से मतलब रहता कि उसके किसी काम में देर तो नहीं हुई। यदि हो गयी तो फिर वो उसे सुनाने में कोई कसर बाकी न छोड़ता ।जब तक सुनाता जब तक सिमरन की आंखों से गंगा- जमुना न बहने लगे। हर बात में उसके माता -पिता को कोसना उसका प्रिय शगल है।
उस दिन रो - धो कर बात आई गई हो गयी। सिमरन अंदर ही अंदर घुलती जा रही है । इस बात का असर अब उसके स्वास्थ्य पर भी हो रहा हैं। वो अक्सर अपने को बीमार सा महसूस करती। किसी काम में उसका मन न लगता ,पर करना है तो करती रहती।उसके चेहरे से हंसी तो गायब ही हो गयी। उसे खुद इस बात का पता न चल पाया। आंसुओ ने स्थायी रूप से घर बना लिया उसके चेहरे पर। उसकी आंखें हमेशा भरी ही रहती अपनी मां की याद में।उस पर भी सितम ये की वो खुलकर रो भी नहीं सकती ,वरना उसे सुनने को मिलेगा हमेशा रोना - धोना ही मचाये रहती है।न खुद खुश रहती है, न घर में किसी को रहने देती है। अनुराग की आदत है हर समय सिमरन को नीचा दिखाने की।अनुराग हर समय उसको ये अहसास करवाता रहता हैं कि वो कितनी बेबकूफ हैं।उसे कुछ नहीं आता। न तो वो सुंदर ही है न ही उसके अंदर कोई गुण ही हैं।
तभी अचानक सिमरन की जिंदगी में एक घटना घटित हुई। एक दिन उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया मैसेंजर पर-hi, आप बहुत सुंदर हैं।  इन शब्दों ने तो कुछ जादू  ही कर दिया सिमरन के अंदर। फिर उसने अखवार में  पढ़ी  एक घटना याद आ गयी और उसने मेसेज करने वाले को बोल दिया आप गलत जगह बात कर रहे हैं। हम शादी शुदा हैं। मेसेजकर्ता ने जबाब दिया तो क्या हुआ। हमें तो शादीशुदा औरतें ही पसन्द आती हैं। हमने आपको क्या गलत बोला । आप है ही खूबसूरत ,बस आपकी तारीफ ही तो की है।उसे ये बात बड़ी अजीब लगी । कोई उसे खूबसूरत बोल रहा है। बस ये बात उसके मन में एक मीठी सी गुदगुदी मचा गयी। शाम को उसके पतिदेव घर आये तो बातों ही बातों में उसने इस बात का जिक्र उनसे कर दिया । सिमरन का मानना है कि अपनों से कभी कोई बात नहीं छुपानी चाहिए। बात वो छुपाते हैं जो गलत होते हैं। पर उसके मन में किसी के लिए कोई भी गलत भावना नहीं है । यही सोच कर उसने बताया , पर उसे क्या पता था कि ये बात बहुत बड़ा तूफान खड़ा कर देगी। उस दिन उसके पति ने बहुत लड़ाई-झगड़ा किया। बहुत सुनाया उसे। वो लाख सफाई देती रही पर उसकी कोई बात नहीं सुनी गई। अंत में अनुराग ने एक सख्त चेतावनी देते हुए उसकी  प्रोफाइल पिक्चर बदल दी ।अब उसकी pic की जगह  भगवान का फोटो था, साथ ही उस मेसेजकर्ता को भी उसने  ब्लॉक कर दिया। कुछ दिन शांति से गुजरे । सिमरन ने एक बात महसूस की किया कि वो चार शब्दों की तारीफ ने कुछ तो असर किया था उसके मन पर, यही तो वो सुनना चाहती है पर किसी और से नहीं ,सिर्फ अपने पति से।  कुछ दिन शांति से गुजरे , पर ये शांति  मन से कोसों दूर थी। मन में अजीब से ख्याल आते रहते उसके। नकारात्मक बातों ने उस्के मन में अपना घर बनाना शुरू कर दिया । उसे लगने लगा की उसका जीवन बेकार हैं। क्यों जी रही है वो , उसे क्या अधिकार जीने का। कभी-  कभी उसे लगता , क्या कभी उसे कोई खुशी मिलेगी भी या नहीं इस जिंदगी में , या यूं ही अधूरी ही रहूंगी अपने जीवन में।भगवान  मेरे जीवन में ही  खुशियोंकी रेखा खींचना क्यों भूल गए🤔🤔😢😢😢😢। फिर अकेले में फूट फूट कर रोती।पर कोई न था ऐसा आसपास जो उसके आंसू पोछता , या उसके चेहरे पर हंसी की वजह बनता। जिसकी बातें मन को सुकून पहुँचाती , जिसे सोचने मात्र से चेहरा खिल जाता। उसने ये सारी उम्मीद अनुराग से की थीं, पर वो तो उसकी सोच से बिल्कुल विपरीत है।करेला ऊपर से नीम चढ़ा, एक तो खुद ही उसे सिमरन से बिना स्वार्थ कोई मतलब नहीं रहता ,पर शक करने की भी कोई वजह न छोड़ता। अगर सिमरन के चेहरे पर जरा भी खुशी दिख जाती तो तुरंत उसे उदासी में बदलने की वजह खोज लेता।कुछ न कुछ ऐसा बोल देता की सिमरन अपने में ही सिमट कर रह जाती। शादी से पहले सिमरन उत्साह व उमंग से भरपूर थी। वो खुले गगन में बहुत ऊपर उड़ना चाहती थी ,देखना चाहती थी इस दुनिया के विभिन्न रंग। महसूस करना चाहती थी इस संसार की अच्छाई व बुराई को। शादी के समय उसकी आँखों में सपना था - पहले तो मैं अकेली थी तो डर था, पर अब अपने पति के साथ इस मस्त नील गगन के चक्कर लगाऊँगी । अब कोई डर न होगा किसी का। न किसी बाज से डरने की जरूरत है मुझे, अब मेरा हमकदम मेरे साथ जो है। पर अनुराग ने तो उसकी सारी आशाओं पर तुषारापात कर दिया। उसके व्यक्तित्व पर ऐसा प्रहार किया कि हरदम हंसने खिलखिलाने वाली एक दम खामोश हो गयी। भूल ही गयी खुद को। दुनिया को बदलने का हौंसला रखने वाली  अपने जीवनसाथी से हार मान  बैठी। पर कहते है ईश्वर के घर देर है अंधेर नहीं।  आज फिर सिमरन के मोबाइल पर समय ने दस्तक दी। उसे उसका खोया आत्मविश्वास, मुसकान वापस करने के लिए। सोशल साइट से फिर किसी ने उसे मेसेज किया। hi, कैसी हो ?  ठीक हूँ , उसने जबाब दिया। सिमरन को थोड़ा अजीब लगा ,क्योकि अब तो उसकी तस्वीर भी नहीं ,फिर क्यों किया मेसेज । उसने ये बात पूछ  ली- क्या आप मुझे जानते हो? कहाँ देखा मुझे आपने , क्यों मुझे मेसेज किया। मेसेजकर्ता  का नाम विराम का था,उसने उसे बताया , उसे उसका नाम बहुत पसंद आया। मैं आपसे दोस्ती करना चाहता हूँ, आप बनोगी मेरी दोस्त।पता नहीं उस समय सिमरन ने क्या सोच ,पर हाँ कर दिया। दोनों ने ही एक दूसरे को अपना परिचय दिया। सिमरन के मन में एक बात हमेशा ईमानदारी को लेकर चलती रहती थी ,इसलिए उसनेअपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में सबसे पहले बता दिया । विराम को सुनकर बहुत हंसी आयी, उसने सिमरन से बोला - अरे भाई मैं भी शादीशुदा हूँ ,मेरा भी एक बेटा है। मुझे सिर्फ आपसे दोस्ती करनी है और कुछ नहीं। आप व्यर्थ की बातें न सोचें। आप अपनी मुझे एक फोटो भेजो न ,मैं फेस रीडिंग जानता हूँ। मैं आपके व्यक्तित्व के बारे में बताता हूँ, आप बताना मैं कितना सही हूँ। ठीक है,कहकर सिमरन ने उसे अपनी एक फोटो भेज दी। फोटो देखकर जो कुछ भी विराम ने बताया वो अक्षरसः सत्य था। सिमरन सोचने लगी अरे वाह ,कमाल का ज्ञान  है विराम के पास। उसे ऐसे ही लोगों से बात करना अच्छा लगता है जिसके  पास कुछ विशेष ज्ञान हो। जिससे हम कुछ सीख सकें। अब तो  दोनों की खूब बातें होने लगीं। विराम सिमरन की खूबसूरती को वास्तविक सुंदरता बताता। उसके  मन की सुदरता की बहुत तारीफ करता । कुछ न कुछ ऐसा सुना देता की मन खुश हो जाता ।घण्टों सिमरन के चेहरे से हंसीं नहीं जाती ।दो दिन बात करने के बाद विराम अचानक सिमरन से कहने लगा- सिमरन जी ,एक बात कहें आप बुरा मत मानना। जी कहिये  सिमरन ने जबाब दिया। विराम- तुम  मुझे अपना दोस्त मानती हो तो तुम मुझे अपनी परेशानी बताओ। तुमको शायद अहसास नहीं है , तुम अवसादग्रस्त हो। जो भी बात हो , मुझे बताओ ।कहने से मन भी हल्का होता है साथ ही परेशानी का हल भी मिलता है। जीवन बहुत अनमोल है ,इसे यूँ रोकर नहीं गुजारना है। जो भी मन करे वो सारी तमन्ना पूरी करके खुशी खुशी जीना है। सिमरन को बड़ा आश्चर्य हुआ ये जानकर, अनुराग उसके साथ रहता है पर उसे इस बात का पता नहीं चला।पर विराम , जिससे मैं सिर्फ कुछ दिन पहले मिली, जिससे चंद मिनट ही बात करती हूँ ।उसे मेरे दुख का ,मेरी परेशानी का अहसास है। उसे ये सोचकर ही सुखद अनुभूति हुई।प्रत्यक्ष में उसने इतना ही कहा- कोई परेशानी नहीं है। आप ऐसा क्यों बोल रहे हो। विराम- चलो तुम नहीं बताना चाहती तो मत बताओ। पर कोई भी बात किसी से कहने का मन करे तो मैं हूँ ,ये याद रखना। एक बात और तुम सोचती बहुत हो , अपने अतीत और भविष्य के बारे में। वर्तमान में जीना सीखो। अच्छा जी ,ये आपको क्यों लगता है ,सिमरन ने कहा। विराम ने बताया -  अभी मैं और तुम बात कर रहे हैं न ,तो अभी भी तुम परिवार ,पति के बारे में ही सोच रही हो ।सिमरन मन ही मन मान गयी विराम को।उसने विराम से बोला - ठीक है , आज से  खुद को बदलने की कोशिश करुँगी। ह्म्म्म ,ये हुई न बात। सिमरन पर विराम की बातों का बहुत असर हुआ। अब उसने बेकार की बातें सोचना बंद कर दिया। सिर्फ वही बातें उसके दिमाग  में जगह पाती जो चेहरे पर मुस्कान दे सकें। वैसे भी विराम की बातों से उसे बहुत खुशी मिलती । उसकी बातों से ही उसे फुर्सत नहीं मिलती की कुछ और सोच सकें वो। अब सिमरन के चेहरे पर हरदम खुशी झलकती , उसके चेहरे की चमक भी बढ़ गयी । ये बात उसने भी कई बार महसूस की। पता नहीं ये विराम की बातों का असर था या उसके मानसिकता में आने वाले बदलाव थे इसके कारण। जो भी हो पर इन बातों का उस पर सकारात्मक असर हो रहा है ,ये सिमरन भी जान गई । एक दिन अचानक अनुराग ने उसका फोन देखा और चुपचाप सब कुछ बदल दिया। पता नहीं क्या किया पर फिर उसे विराम दिखाई न दिया। न ही कोई मेसेज आया उसका।पर अब सिमरन को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ा। न वो रोई , न कुछ उल्टा सीधा दिमाग लगाया। उसने विराम की बातों को जीवन में अपना लिया था। वो कैसे खुश रहे ,बस यही सोचती और कुछ नही।  एक अजनबी बनकर विराम कुछ पल के लिए उसके जीवन में आया और उसे एक नयी दिशा दे गया।  उसने अपने दुखों से ऐसा ब्रेकअप किया कि फिर कभी पैचअप न हो पाया गमों से। अब हर पल गुलजार है सिमरन की जिदंगी।।।
कर लिया है ब्रेकअप अपने  गमों से
सुन लिए बहुत ताने अपनो से
अब तो बदलना है  खुद को
बस मस्त रहना है ,
जिंदगी को अपनी गुले गुलजार करना है।।।।



                  आशा  झा  सखी