नंदिनी अपने पति नीरज और जेठानी रूपा के गलत सम्बंधों के बारे में जानकर इस धोखेबाजी को सहन न करने का फैसला करती है।अपनी बात साबित करने के लिए मौका पाते ही वीडियो बना लेती है।और अब उसे अपने जीजाजी और भाई का इंतजार है।आगे........
       वो अपने कमरे में रुआंसी बैठी थी तभी उसे दो छोटे छोटे हाथ अपनी आँखों पर महसूस हुए और मीठी सी आवाज आई -"बताओ मौसी कौन है?"इलू की आवाज सुनकर इतनी तकलीफ में भी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।उसने इलू को प्यार से गोदी में उठा लिया।इलू से ही उसे पता चला कि जीजाजी और भैया के साथ गीतिका दी भी आई है।यह जानकर उसकी हिम्मत बढ़ी। 
      नंदिनी ने इलू को गोदी में उठाया और बाहर आ गई जहाँ सब बैठे थे। रूपा बेशर्मी से सबके साथ मेलजोल और आवभगत का नाटक कर रही थी,नंदिनी को हैरानी हुई कि कुछ लोग किस हद तक दोहरा चरित्र निभा सकते हैं।नीरज और उसके भाई  किसी काम से बाहर गए थे।सास ससुर वही बैठे थे और सब बात कर रहे थे।जैसे ही गीतिका की नजर नंदिनी पर पड़ी,वो उठी और नंदिनी को गले लगा लिया।कुछ मिनिट बाद दोनों बहनें अलग हुई,गीतिका ने भावुकता से नंदिनी के सर पर हाथ फेरा। फिर नंदिनी अपने कमरे में चली गई।और गीतिका को भी कॉल आ गया तो वो एकांत में आ गई थी। तब तक नीरज लौट आये थे।
      कुछ देर बाद गीतिका जब बात करके आई तो उसके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था।उसने अपने पति से कहा कि अब हमें नंदिनी को लेकर चलना चाहिए।तो नीरज की माँ ने कहा -इतनी जल्दी।कोई परेशानी है क्या?इलू के पापा ने भी कहा कि अचानक क्या हुआ गीतू?
        "कुछ ठीक नही है बसंत जी,यहाँ कुछ ठीक नही है।मेरी बहन के साथ धोखा हुआ है।"गीतिका को बहुत जोर से रोना आ गया।"क्या हुआ बेटा, आपको कोई गलतफहमी हुई है।"नीरज के पापा बोले।
       तो उसने कहा कि क्या गलत हुआ है ये तो आप अपनी बहू रूपा और अपने बेटे नीरज से पूछिए।जिन्होंने देवर भाभी के रिश्ते को अपवित्र कर दिया है।इन दोनों से पूछिए की मेरी बहन की जिंदगी क्यूँ बर्बाद की।हमसे कौन सी दुश्मनी थी जो हमसे रिश्ता जोड़ा?
       गीतिका की तेज आवाज से  रूपा भी किचन से आ गई थी और नीरज के माँ पापा भी सकते में थे।उन्होंने भी आवेश में कहा कि आप ऐसा बेबुनियाद इल्जाम लगा रही है।किसने कही ये गिरी हुई बात, कई लोग हैं जो हमसे जलते हैं।उनने कहा और आपने मान लिया।ये गलत है।नीरज ने भी कहा कि आप तो नाम बताओ उसका जिसने ये बोला।
       रूपा भी चिढ़कर बोली कि आपको कोई हक नही कि मेरे बारे में ऐसी गन्दी बात कहे।सबकी बातें सुनकर गीतिका से और चुप नहीं रहा गया,उसने अपने मोबाइल में रूपा की रिकॉर्डिंग ऑन करके नीरज के पिता और अपने पति बसंत को दिखाया। साथ ही बताया कि जब वो नंदिनी से गले लगी थी तब उसने कहा था कि गीतू दी मुझसे अकेले में कॉल पर बात करो ,जल्दी।अभी बाहर मैं उसी से बात कर रही थी।
        रिश्ते का गंदा सच अब सबके सामने था।नीरज के माँ ने नीरज को बहुत गुस्सा किया और रोने लगी।उसके पापा ने भी गुस्से में उस पर हाथ उठा दिया। गीतिका ने कहा मै अपनी बहन को ले जा रही हूँ,काश आप अपने रुतबे के साथ साथ परिवार पर भी ध्यान देते।नंदिनी का तो सब सामान पैक ही था।वो रोती हुई आई,अपने सास ससुरजी के सामने हाथ जोड़कर बोली कि मैं जा रही हूँ ,हमेशा के लिए।और नीरज और रूपा की ओर देख के कहा कि में आप दोनों को कभी माफ नही करूंगी।गीतिका ने उसका हाथ पकड़ा और बाहर गाड़ी के पास ले आई।किस्मत ने सिर्फ एक दिन में ही नंदिनी की जिंदगी बदल दी।नंदिनी अपनी माँ के घर के लिये निकल पड़ी,कभी न लौटने का फैसला करके।
        सबके जाने के बाद नीरज अपनी माँ पापा के पास गया और बोला कि अब जब आप सब सच  जान ही चुके हो तो मैं बता दूं कि मैं रूपा को ही चाहता हूँ और मुझे कोई फर्क नही पड़ता कि कोई हमारे बारे में क्या सोचता है।
       इधर गीतिका नंदिनी के लिए बहुत परेशान थी।इतने लंबे सफ़र में उसने सिर्फ इलू से ही थोड़ी बात की वरना गुमसुम थी।उसने 8चगीतिका से कहा कि माँ पापा को आप मत बताना उन्हें मौका देखकर मैं ही सब बता दूंगी।
         जब वो लोग घर पहुँचे तो मम्मीऔर वंदिता इंतजार कर रहे थे।वन्दु ने उसे चिढ़ाते हुए कहा कि इतनी जल्दी कैसे आ गए आप लोग ,की दी कि ससुराल वालों ने खाने को नही पूछा,तो गीतू फीकी हँसी हँस दी।और नंदिनी ने आँखे नीची कर के अपने आंसुओं को सम्हाल लिया।मम्मी ने उसका पानी उतारा,वन्दु उसके गले लग गई।माँ की आँखे भी नम हो गई।उन्होंने उसके चेहरे की उदासी का कारण पूछा तो गीतू ने कहा कि  सफ़र की थकान है।आराम कर लेगी तो अच्छा लगेगा। 

          ✍🏻प्रीति ताम्रकार
                 जबलपुर