नंदिनी अपने ससुराल से मम्मी के घर आ गई।मम्मी से उसकी उदासी छिप न सकी।कारन पूछने पर गीतू ने कहा सफर के कारण  थकावट हो गई है।मम्मी ने प्यार से सर पर हाथ फेरा तो नंदिनी रो पड़ी।उन्हें देख वन्दु और गीतू की आँखे भी नम हो गई।          तभी  उसके पापा दुकान से आ गए और बोले-आ गई मेरी नंदू बिटिया।कैसी है मेरी बेटी।फिर अपनी पत्नी से बोले -अरे भाई कुछ खिलाया पिलाया भी या नहीं।पापा को सामने देख  नंदिनी उनके गले लग गई।वन्दु ईर्ष्या का नाटक करते बोली-हाँ हाँ, यही दोनों तो बस आपकी बेटी हैं।मैं तो घर की मुर्गी दाल बराबर हूँ।उसकी बात सुनकर सब हँस दिए,नंदू के चेहरे पर भी फीकी सी हँसी आ गई। गीतू ने उसके सर पर हल्की सी चपत लगाकर बोला -चल मेरी ड्रामा क्वीन,सबके लिए डिनर सर्व करें। 
          डिनर के बाद नंदिनी के भैया और जीजाजी अपने घर चले गए।जाते जाते नंदिनी को बोले हिम्मत रखना और समझदारी से काम लेना।तुमने कहा था तुम ही बात करोगी इसलिये हम चुप रहे पर जल्दी से जल्दी बात करना।
           इधर वंदिता बार बार उससे पूछ रही थी कि वहाँ ससुराल में सब कैसे हैं, जीजू ने कुछ बात की या हमेशा की तरह चुप ही रहे।सबका नेचर कैसा है?तो गीतू ने उसको प्यार से समझाया कि सुबह होगी तब भी बात कर सकते।अभी नंदू को आराम करने दो।तब कही वंदिता देवी ने अपने सवालो पर ब्रेक लगाया।
         वंदिता इलू को अपने साथ सुलाने ले गई।मम्मी पापा भी सोने चले गए।गीतिका ने देखा नंदिनी बालकनी में बैठी है।तो उसके पास आई और बोली –नंदू, सम्हालो खुद को ।और तुमने कहा था कि तुम खुद मम्मी पापा से बात करोगी।
क्यों नही बताया उन्हें,कब बताओगी।बसन्त का भी कॉल आया था।उनने कहा है कि हमें जल्दी से जल्दी मम्मी पापा को सब बता देना चाहिए।
         तभी दरवाजे पर हुई आवाज से दोनों ने पलटकर देखा तो उसकी माँ पुष्पा स्तब्ध सी खड़ी थी।दोनों बहनों ने उन्हें पास में पलँग पर बैठाया।वो समझ गई थी कि माँ सब सुन चुकी हैं।
नंदिनी–माँ आप ठीक तो हो।
पुष्पा –तुम दोनों क्या छुपा रही हो।मैं नंदू की उदास आँखे देखकर समझ गई थी कि कोई तो ऐसी बात है जो तुम लोग बता नही रहे।क्योंकि जब हम लोग ने तेरे ससुराल के हालचाल पूछे तब बसन्त और आशु ने भी बात टाल दी।मेरा दिल बहुत घबरा रहा है बेटा, बता न क्या हुआ।
नंदिनी माँ की गोद में सिर रखकर रो पड़ी।गीतू ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि मम्मी हमारी नंदू के साथ बड़ा धोखा हुआ है,नीरज के .......।  इतना बोल वो कुछ पल के चुप हो गई।
मम्मी ने कहा –नीरज के क्या गीतू,आगे भी तो बोलो।
गीतिका अपने आंसू पोछते हुए बोली– नीरज के अपनी भाभी के साथ गलत सम्बन्ध है मम्मी।
पुष्पा अविश्वास से उसे देखने लगी। फिर बोली–बेटा तुझे कोई गलतफहमी हुई होगी।किसने कहा तुमसे ये सब।
मम्मी मैंने अपनी आँखों से उन लोग को साथ देखा है–नंदिनी ने कहा और जो भी देखा वो सारी बातें उसने बता दी।साथ ही यह भी कि कोई उसकी बात का विश्वास नही करता इसलिए कैसे उसने मौका मिलते ही रूपा की बातो का वीडियो बनाया।गीतिका ने मोबाइल में वीडियो दिखाया।
          क्या उनके घर में किसी को नही पता चला ये सब।पुष्पा ने पूछा तो नंदिनी ने नही में सर हिला दिया।
पुष्पा–हमसे भूल हो गई बेटी नीरज को परखने में।हमें माफ़ कर दे बेटी।कहकर वो रोने लगी।
नंदिनी–माँ आपकी क्या गलती,आपने तो वही देखा जो दिखाया गया।उन दोनों के बीच इतने गन्दे रिश्ते की तो कोई कल्पना भी नही कर सकता।आप खुद को दोष मत दो।
मैं कल ही तेरे पापा से बात करती हूं –पुष्पा ने अपनी गोदी में नंदिनी के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।उन सबके आंसू सुख गये थे रोते रोते।तीनो चुपचाप एक दूसरे को सहारा देती बैठी थी।माँ की गोद में प्यार पाकर नंदिनी को थोड़ी राहत मिली तो उसकी नींद लगने लगी।तब गीतू ने पुष्पा को कहा आप चिंता मत करो माँ ,आप सोने जाइये मैं इसका ध्यान रखूंगी।बारबार गीतू के समझाने पर वो अपने कमरे में चली गई ,नंदिनी को भी उसने बेड पर सुलवा दिया।
        पुष्पा की आँखों में अब नींद नही थी।चिंता थी बस अपनी बेटी के भविष्य की।किसी तरह आँखों में रात काटी। 
        शेष अगले भाग में.....

✍🏻प्रीति ताम्रकार
      जबलपुर