आज फिर किताबों के पन्ने खोले तो वो दिन फिर मेरे सामने आकर खड़े हो गए....! तेरे और मेरे बीच जो नजदीकियां हुआ करतीं थीं....! हर पल

तेरे ही ख्याल और तेरी ही बातें मन में चला करतीं थीं....! तुझे ही देखकर तसल्लियाँ दिया करते थे और तूं भी हमे देखकर मुस्कुराया करती थी...! तेरी उन अदाओं का जलवा मन को भाया करता था, न जाने कहाँ खो गया जो मेरा साया हुआ करता था...! बढ़ रही थी दूरियाँ हमारी खामोशियों के कारण,, लेकिन नजरों से नजरों को देखना अभी भी जारी था...! 
हो सकता है कि मुझमें ही कोई कमी रह गई होगी कि मै ही तेरे काबिल न था, लेकिन मुझे तेरी खामियों भी खूबियों की तरह से ही प्यारी थी...! तूने ही मेरी चाहत और तूं ही मेरा अरमान थी,इन लबों ने साथ न दिया और हिम्मत न आई...! जिसे मैंने अपना ही समझा वो निकली पराई,हमारे हाथों की लकीरों में शायद वो न थी, क्योंकि फिर कभी भी मुझसे मिलने न आई....!! 

       🌱🌱मनु✍🏻
      ।।। संकलन।।।