जब काली गहरी रातें हों,
तुम मिलने आ जाना।
जब दर्द से भीगी आँखे हों ,
तुम मिलने आ जाना।
जब दिल में अधूरी बातें हो,
तब तुम मिलने आ जाना।
जब तन्हां मेरी हयातें हो,
तब तुम मिलने आ जाना
जब न सावन में बरसाते हों,
तब तुम मिलने आ जाना।
जब तपती तेज दुपहरी हो,
तब तुम मिलने आ जाना।
जब ठिठुरती सर्द रातें हो ,
तब तुम मिलने आ जाना।
जब हो जाये यौवन की साँझ ,
तब  तुम मिलने आ जाना।
जब चलें हवाएं पछुआ सी बिखरी ,
तब तुम मिलने आ जाना।
क्योंकि  भीगते सावन में तो कोई भी आ जाएगा।
क्योंकि चाँदनी रातों में तो कोई भी आ जाएगा ।
क्योंकि काजल भरी आँखों मे तो कोई भी आ जाएगा।
क्योंकि मुस्कुराते हों होंठ तो कोई भी आ जाएगा ।
क्योंकि भीगते सावन में तो कोई भी आ जाएगा।
क्योंकि सजी महफ़िल में तो कोई भी आ जाएगा।
क्योंकि बसन्ती मौसम में तो कोई भी आ जाएगा
क्योंकि चलती पुरुवा में तो कोई भी आ जाएगा।
क्योंकि यौवन की मदमाती लहरों में तो कोई भी आ जाएगा।
पर इन सबसे विपरीत अवस्थाओं में मुझको यकीं हैं
तुम हो आओगे ,और मेरे इस यकीन को विश्वास में बदलने तुम आ जाना।

अंजू दीक्षित,
बदायूँ, उत्तर प्रदेश।