मैं अबला नही, मैं सबला हूँ
किसने कहा हूँ बेचारी
विश्वास स्वयं पर लिये हुए
मैं आज के युग की हूँ नारी
माँ पापा का मुझे लाड़ मिला
भाई के सम ही दुलार मिला
मुझे शिक्षा का अधिकार मिला
तो कैसे सबने सोच लिया
कि दया की हूँ मैं अधिकारी
मैं अबला नहीं..............
.....…..... युग की हूँ नारी
मैं डॉक्टर भी,वैज्ञानिक भी
पत्रकार,किसान, मैं सैनिक भी
ट्रक,ट्रेन और प्लेन चलाये भी
कंधे से कंधा मिला के चली
हर क्षेत्र में कदम बढ़ा रही
मैं अबला नहीं..............
.....…..... युग की हूँ नारी
पहले पैरों पर हुई खड़ी
मनचाहे वर संग ब्याह करी
है पहनावे की भी आजादी
हर विषय में अपना मत देती
हर निर्णय में भागीदारी
मैं अबला नहीं..............
.....…..... युग की हूँ नारी
हाँ, यह सच है कि कई बहनें, हैं आज भी जीती अंधेरों में
कभी शिक्षा से,कभी मान से, वंचित खुशियों के सवेरों से
समाज को करें जागरूक, करें मुक्त पिछड़े विचारों से
हर बुद्धिजीवी आगे आए, यह है सबकी जिम्मेदारी
मैं अबला नहीं..............
.....…..... युग की हूँ नारी
✍️प्रीति ताम्रकार
जबलपुर

3 टिप्पणियाँ