जिन्दगी को थोड़ा आसान बनाते है...!
आओं गमों को थोड़ा हँसना सिखाते है...!!

ख्वाब एक नया सजाते है...!
आओं चाँद को इशारा करके जमीन पर बुलाते है...!!

मन के भीतर की छवि को आईने में दिखाते है...!
आओं तुम्हें तुम्हारी शक्सियत से मिलाते है...!!

दुनिया की कुछ रीतों को निभातें है...!
वधू के साथ दूसरे तोल पर पिता की बेबसी को बिठाते है...!!

बिखरे नातों के बीच प्रेम की एक गाँठ बाँधते है...!
मन के सारे गीले शिकवे भुलाते है...!!

बीना मौहब्बत के है ये दुनिया कब्र सी...!
आओं मिलकर इस जगत को प्रेममय बनाते है...!!

जिन्दगी को थोड़ा आसान बनाते है...!
आओं इसे अपनी उँगलियों पर नचाते है...!!
                
      आरती सुधाकर सिरसाट
      बुरहानपुर मध्यप्रदेश