कर सकती है तू ,हर काम नारी,
 तू है जीवन की नई दिशा नारी,
 शीतल लहर सी हो तुम नारी
 निर्विकार तुम बढ़ती रहो नारी 
दृढ़ इच्छा शक्ति की मिशाल हो नारी
 ममता ,समर्पण ,त्याग की मूर्ति हो नारी
 शांति,समता ,शक्ति की त्रिवेणी हो नारी
 विलक्षण तेरी है ऊर्जा अद्भुत नारी,
बढ़ती चल अनंत की ऊंचाई पर नारी 
प्रकृति की अनुपम रचना हो तुम नारी,
 लक्ष्मी,दुर्गा ,सरस्वती का रूप तू नारी 
 "श्रुति"लेखनी से नमन सदा करती नारी,,,,।


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        डॉ सुरभि जैंन "श्रुति"
          सतना मध्यप्रदेश