दिवस तीसरा"चढा है  सब पर,
मदमस्त ,भगोरिया,मेले का रंग!
नवयुवतियाँ मांदल पर थिरके"
वेशभूषा  के कितने ढंग!
भावी जीवन जी लेने को"
तिरछी, चितवन आंक रहे!
पान का बीणा ,हाथ मे लिऐ"
आस पास को भांप रहे"!
नवयुगल ,मस्ती मे झूमे"
चढा है ,बस मस्ती का रंग"
झूले चकरी झूल रहे है सब"
सब ओर छाया ,आन्नद"
सब भूले है"करोना काल को"
सब मे ,उल्लसिता छायी है!
नजर अँदाज करो न उसको"
वो ,हवा नही ,बिसराई है"
त्यौहारो'का जश्न मनाओ"
किसने तुमको मना किया"
बस तुम सुनो ,मेरे वो भाई'
न जीवन से खिलवाड करो"
मास्क लागवो ,गज भर दूरी,
बस इसका सम्मान करो"
आज भागोरिया,कल फिर होली"
मिलकर सब हुडदंग करो"

रीमा महेन्द्र ठाकुर(लेखिका )
महात्मा गाँधी मार्ग रानापुर 
जिला -झाबुआ
मध्यप्रदेश (भारत)