यह कौन विहग है रे ?
जो रुई के फाहे से सुकोमल
पंखों के सहारे
व्योम के आँचल से तारों के मोती चुन चुनकर
झोली में समेटे
सुरभित समीर की पालकी पर तिरता
चन्द्र प्रेमी चकोर सा
अंधकार की फौज को खदेड़
शनैः शनैः मधुर फल खाने को
उद्यत हो रहा है
भुभुक्षित
बाल हनुमान सा।

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