गुड़िया गुड़िया मेरी प्यारी गुड़िया
परियां परियां मेरी प्यारी परियां
हंसती, मुस्कुराती हरदम यूं ही खिलखिलाती रहना
अपने आशियाने में खुशियों की रौनक तुम यूं ही लाती रहना ।।
एक पल भी रोता हुआ तुमको हम ना देखें
है दुआ हर पल को जी ले ना तुम जी भर के
हौसलों की उड़ान से छूलेना तुम सारी बुलंदियों को बाहें फैलाके ना डरना कभी मुश्किलों में बेखौफ होकर चलना इन राहों में ।।
हमने तो थाम रखा है ना हाथ तुम्हारा
संग तुम्हारे है ना हर पल हमारा साया
जीना अपनी खुशियों को अपने ढंग से
कर देना इस दुनिया को फिर अचंभित अपने दम से ।।
परवाह तेरी फिक्र भी तेरी होती है
बुरे कदमों की आहटों से दिल में धक-धक सी होती है
मुश्किलों से भरा कठिन यह जो डगर है
संभलना फिर आगे बढ़ना यही जीवन सफर है।।
अपने घर का इस जहां में सम्मान बढाते रहना
नादान लाडली मेरी सयाने पन का ताज भी पहनकर रखना
बनकर मिसाल काबिलियत की तुम ही सबको संभालना
थोड़ा सा आसमां तुम अपने लिए भी जरूर रखना ।।
फिर से बीते हुए कल जैसा किसी को कोई अफसोस ना हो
फिर कोई ना कहे बिटिया आई है आखिर वह तो पराई है
बदल देना इस जग कि फिर वही पुरानी रीत को कि सब कहे बिटिया आई है परियां आई है संग खुशियां ही खुशियाँ लाई है।।
राजेश्वरी ठाकुर
छत्तीसगढ़

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