याद बहुत आयेगी, तुम सब की
आंखों में कोई चमक नहीं है।
खोया चांद था,और खोया आसमा
रंग पड़ी फिकी थी,याद की

कोई अनोखा तोहफ़ा नहीं मिला
इस जीवन की राह है।
सब कुछ खोकर ,सब कुछ पा लिया। 
खास बात ये रही तुम साथ थे।

कुछ अनोखा रिवाज आज भी है।
इस दुनिया में,
कुछ अपने गैर होकर भी अपने हों जाते है,
और कुछ अपने भी गैर हो जाते है।
कुछ पाकर एक नूर मिल गया। 


              लक्ष्मणी  खरे 🖌️

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼