आँखें, जब तक झुकी रहे,
दिल की बातें छुपी रहे!
ये आँखें गर मिल जाए तो,
तो, तो कयामत आ जाए!!
हाँ कयामत आ जाए!
दिल का हाल हुआ है बुरा,
कैसे इसको रोक सकूँ,
आँसू आये आँखों में,
इसको ना मैं पोंछ सकूँ!!
जा जा ओ हरजाई,
ये कैसी प्रीत निभाई!
आँख से आँख मिलाकर तूने,
ये कैसी अगन लगाई!
ये कैसी अगन लगाई!!
श्वेता कर्ण

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