काश मुझ में पीके जैसा टैलेंट होता
छः घंटे हाथ पकड़कर सब सीख लेता
चाहे कोई भाषा होती 
या होता कोई हुनर ।

अपनी मोटी अकल से परेशान हूं
इसके कारण होता शर्मसार हूं
आसान बात भी मुश्किल लगती
जैसे कोई पहाड़ी चढ़नी होती ।

जल्दी से कुछ सीख ना पाता
चाहे जितना भी दिमाग लगाता
अब तो सिखाने वाले भी कन्नी काट लेते हैं
देख के मुझको रास्ता बदल देते हैं ।

काश मुझमें  पीके जैसा टैलेंट होता
छः घंटे हाथ पकड़कर सब सीख लेता ।



                 धनु दयाल