हे! कनियाँ,कनिक घूँघट उठाऊ
नाम की भेल,जे हमरा बताऊ
ओहो! सुंदर लाल,टमाटर चेहरा
कि सब खेलब,कही खेल सुनाऊ
हे! कनियाँ,कनिक.....


किछु बाजू,कि भरि राइत जगायब
होइछ जे पत्नी कै,धर्म निभायब
सुंदर बाजैत,कंगन कै बोलि अछि
बाल'क गज़रा,केहन जे,हमरा बताऊ
हे! कनियाँ,कनिक.....


मिलन-तन जोड़ी,उमैर रहल अछि
राग समायल,ललैक रहैल अछि
हम-प्रिय,अहाँकै मुस्कायब
राइत-इजोरिया कै,गीत सुनाऊ
हे! कनियाँ,कनिक.....



       लेखक:-विकास कुमार लाभ
                     मधुबनी(बिहार)