उनसे कभी मिलना मय्यसर होगा या नहीं,
सोचें बिना मोहब्बत कर ली,
दिल ने इकतरफा कर दीं सारी दलीलें,
नाम उसके जज्बों की इनायत कर दी।

कभी कुछ भी न मांगा उनसे ,बस वफा के अलावा,
   वो बेवफा हो गया तो भी बुरा न हुआ,
क्योंकि हमने बनके खुदा उसकी इवादत कर ली ।
 
अब दूर पास का कोई मशला ही नहीं अंजुम,
अब जुदा उनसे  कोई लम्हां ही नहीं अंजुम,
अपनी ज़िंदगी मे इस तरह उनकी आमद कर ली।

तेरे दिए दर्द ,तेरे कहे अल्फाज अब नहीं चुभते,
 आँखों से अश्क अब नहीं बहते, 
तेरे साथ बिताए हँसी पलों से मासूम दिल की हिफाजत करली।


अंजू दीक्षित, 
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।