ममत्व से भरी मूर्ति थी, साहस और करुणा की प्रतिमूर्ति थी,
अक्षम्य ज्ञान का दर्पण भी थी,
स्नेह का प्रतिबिंब भी थी !!!!!!
सबको खुश देखने का सपना पाला था,एक ही धागे में पिरो सके सबको उसके पास माला था !!!!!!!
जीवन डगर संघर्षों की रही सदा,
पावनी ,निर्मल गंगा बनी रही सदा,
अदम्य हौसला पार कर दिया था
सपना एक बुलंद खड़ा कर लिया था !!
ऊंची शिक्षा देकर तनय को विदेश भेजना है,
करेगा नाम रोशन और संस्कारों को भी सहेजना है!!!!
सपना साकार हुआ था उस दिन,
परिश्रम और प्रार्थना का प्रतिफल आया था जिस दिन ,
समेट कर मां की दुआएं
बेटा उड़ गया प्लेन में,
सब हर्षित थे,सब लीन थे,
काल चक्र का ना आभास था!!!!!!
अकस्मात कुछ नियति हुई,
मां काल की ग्रास हुई,
हिल गया सबका स्तंभ,
प्राणों की यमदूत से प्रीति हुई !!!!
मृत्यु शैय्या पर थी विराजमान,
जन जन कर रहा गुणगान,
सिसकियां ना रुकती थी,शीत लहर यूं चलती थी,आंसू बन ओस टपकती थी,
बेटे की राह देखती आंखे, दरवाजे से ना हटती थी !!!!!
दृश्य बड़ा विदिर्ण हुआ, बेटा जब मां के समीप हुआ ,
मां , क्यूं हुआ ये, क्या हुआ ये ??
मेरे पुण्य का क्यों क्यों नाश हुआ ये !!
उस दिन मुझको ये भान हुआ,
राइट बंधु की खोज पर मान हुआ,
अगर प्लेन ना होता ये,
चरन स्पर्श कर पाता नेह,
रहे समय पहुंच पाया जो,
मुखाग्नि मां को दे पाया वो !!!!!!
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर (मध्य प्रदेश)

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