हैलो.......हैलो........हैलो......"सुवन"
"रमन"...क्या हुआ, कुछ तो बोल....यार..."सुवन" "राज" का एक्सीडेंट हो गया है....तू जल्दी आ जा, मैंने एम्बुलेंस के लिए काल कर दिया है,....."रमन" वैसे " राज ठीक तो है ना?? हाँ बेहोश है और खून भी बहुत निकल रहा है बस तू जितना जल्दी हो सके आ जा...ठीक है मैं 2 मिनट में पहुँच रहा हूँ ।
            एम्बुलेंस "सुवन" के पहुँचते ही  भी आ गयी और सुवन और रमन "राज को लेकर हॉस्पीटल पहुँच जाते हैं , और "राज" को एडमिट करा देते हैं,  थोड़ी देर में ही "राज" को होश भी आ जाता है , " सुवन" " रमन" से कहता है कि यार आज तू यहाँ  "राज" के पास रुक जा कल मैं रुक जाऊँगा ! !........"रमन" ठीक है यार तू घर चला जा ।
                   जैसी ही " सुवन" वापस चलता है, उसकी निगाह एक बैड पर लेटी एक लड़की पर रुक जाती हैं......... ""अरे ये तो "पनीता" है "", इसे क्या हुआ?? " सुवन" वहाँ से  आँख बचाकर स्टाफ नर्स से पूछता है कि सिस्टर वो सामने बैड पर जो लड़की लेटी हुई है, उसे क्या हुआ है??  सिस्टर सुवन से पूछती है कि क्या तुम इस लड़की को जानते हो?? "" सुवन" जी...जी....नहीं, मैं तो यहाँ अपने दोस्त को एडमिट कराने आया था उसका एक्सीडेंट हुआ है!!  सिस्टर... ओके भाई!!......सिस्टर "सुवन" को बताती है कि इसका नाम "पुनीता"है और ये दिल्ली के बहुत बड़े उद्योगपति "अनूप जैन की बेटी है, इसने घर में रखे कैमिकल को पी लिया था जिससे इसकी पहले एक किडनी खराब हुई, अब दूसरी भी आधी खराब हो चुकी है, इसकी डेली डायलिसिस होती है, इसके पिताजी ने टेलीविजन, समाचार पत्रों के माध्यम से किडनी देने वाले को एक करोड़ रुपये तक देने को कहा है फिर भी किडनी देने वाला कोई नहीं मिल रहा, अब इसका कुछ पता नहीं कब तक ये जिंदा रहे......ये सुनते ही "सुवन" की आँखों में आँसू छलछला आये..... सिस्टर भाई तुम क्यों रो रहे हो?? तुम तो इसे जानते भी नहीं!! जी सिस्टर, "बस कुछ याद आ गया",  कहकर "सुवन" वहाँ से निकलकर घर आ जाता है ।
                    "सुवन" की माँ "कामता देवी" पूछती हैं कि बेटा तू इतनी देर से कहाँ गया हुआ था? "सुवन"....माँ "राज का एक्सीडेंट हो गया था", मैं और रमन उसे लेकर हॉस्पीटल गये थे,...... "अरे तो तू मुझे बताकर भी जा सकता था, मुझे तेरी चिन्ता हो रही थी कि तू बिना बताए कहाँ चला गया".??....वैसे अब राज कैसा है अब?.... माँ  उसका खून बहुत वह गया है तो कमजोरी बहुत है और सीधे पैर में फ्रैरेक्चर है, वैसे माँ अब वो होश में आ गया था मैं "रमन" को छोड़कर आ गया हूँ । चल तू मुँह हाथ धो ले मैं तेरे लिए खाना लगा देती हूँ.... "नहीं माँ मुझे भूख नहीं है......कहकर "सुवन" अपने कमरे में जाकर लेट जाता है, और वो " पनीता" के बारे में सोचकर रोने लगता है, उसके दिमाग में "पनीता के प्यार से लेकर पनीता के पापा से किए वायदे तक की सारी बातें घूमने लगती हैं" और वो रोते 2 कब सो जाता है पता ही नहीं चलता।
                    "सुवन" का परिवार और "पनीता" का परिवार एक ही कॉलोनी  में रहते थे""और " सुवन के पिता" "देवकी नंदन", "पनीता के पिता" "अनूप जैन की फैक्टरी में मैनेजर की नौकरी करते थे, इसी वजह से दोनों परिवारों का एक दूसरे के यहाँ आना जाना लगा रहता था । "सुवन और पनीता" एक ही स्कूल में पढ़ते थे, "सुवन" पढ़ने में होशियार था तो पनीता उससे अपनी प्रोबलम पूछती रहती थी, धीरे 2"" सुवन और पनीता की दोस्ती प्यार में बदलने लगी"", "पनीता....सुवन से कहती कि यार सुवन मैं तुमसे ही शादी करूँगी", पर "सुवन" "पनीता" को समझाता है कि यार "मैं तुमको बहुत चाहता हूँ और मैं भी तुमसे ही शादी करना चाहूँगा", पर हमारी हैसियत तुम्हारे परिवार से बहुत कम है,  और मेरे पापा तुम्हारे यहाँ नौकरी करते हैं, अंकल कभी इस बात के लिए तैयार नहीं होंगे......"पनीता" यार "सुवन" प्यार में हैसियत कोई मायने नहीं रखती, मैं अपने पापा को तैयार कर लूँगी.....अगर वो फिर भी नहीं माने तो मैं कभी शादी ही नहीं करूँगी....."सुवन"....."पनीता" यार शादी तो मैं भी किसी और से नहीं करूँगा ये मेरा भी तुमसे वायदा है ।
                        एक दिन "पनीता" के घर में कोई नहीं होता है वो "सुवन" को कॉल करके अपने घर आने को कहती है "सुवन" भी माँ से "रमन" के घर जाने का कहकर " पनीता के घर पहुँच जाता है, सुवन डोर बैल बजाता है "पनीता"  डोर खोलकर "सुवन" को अन्दर बुलाकर फिर डोर बंद कर देती है........"सुवन"...."पनीता" को बस देखता ही रह जाता है, "पनीता" ने लाल रंग का सूट पहना हुआ था,.....हाथों में हरे रंग की चूड़ियाँ पहनी हुई थीं.....दोनों हाथों में मेंहदी लगी हुई थी और दोनों हाथों के बीचों बीच S बना हुआ था......"सुवन" यार "पनीता" ये क्या है??........ "पनीता"......."सुवन" मैं आज तुम्हारी दुल्हन बनी हूँ.....मुझे हमेशा के लिए अपनी पत्नी बना लो....इतना कहते ही "पनीता" "सुवन" के सामने सिंदूर की डिब्बी कर देती है " पर यार पनीता तुम्हारे पापा को ये सब पता चल गया तो जानती हो, वो क्या करेंगे?.......... हाँ बस मुझे मार ही तो डालेंगे....इससे ज्यादा और क्या कर सकते हैं?? कम से कम मैं तुम्हारी पत्नी होकर तो मरूँगी ... "पनीता"ने रोते हुए "सुवन" से कहा!! " सुवन" की आँखों से भी अश्रुधारा बहने लगी और "पनीता" को अपने सीने से लगाकर " उसकी माँग  में सिंदूर भर दिया" ।
                          अचानक डोर बैल बजती है.... जैसे ही पनीता डोर खोलती है, " अनूप जैन को देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है"....पा...पा आप तो मुम्बई गए थे!!.......हाँ पर यहाँ एक जरूरी मीटिंग आ गयी तो एअरपोर्ट से वापस आ गया, कहते हुए अनूप जैन जैसे ही घर के अंदर जाते हैं " सुवन" को " "पनीता" के बैडरूम में लेटा देखकर उनका पारा हाई हो जाता है, और पनीता को जोर से डाँटते हुए पूछते हैं , ये "सुवन" तुम्हारे बैड रूम में क्या कर रहा है??.... "पनीता" पा... पा मैं घर में अकेली थी तो मैंने ही "सुवन" को बुला लिया था.... ठीक है तुमने बुला लिया!!  पर इसकी इतनी हिम्मत हो गई कि तुम्हारे बैड पर लेट गया?...... पापा क्या हो गया तो?  पनीता इसकी हैसियत और हमारी हैसियत में बहुत अंतर है...और  आज के बाद ये कभी यहाँ घर में ना आ............... जाए !!............." सुवन " बस एक बार " पनीता की तरफ देखता है और सीधा अपने घर आ जाता है ।
                     रात को "सुवन" अपने कमरे में लेटा, बहुत परेशान होते हुए सोचने लगता है कि प्यार में भी हैसियत देखी जाती है ??....आज मैंने " पनीता की माँग भर दी है....तो उसके विश्वास को कभी टूटने ना दूँगा..... उधर "पनीता" का  रो-रो कर बुरा हाल है कि, "आज मेरी वजह से "सुवन" की जो इनसल्ट हुई है" उसके लिए मैं खुद को कभी माँफ नहीं कर पाऊँगी,  मैंने ही उसे बुलाया था.....यह सोचते 2 वो रोते -रोते लेटी रहती है ।
                     आज रविवार था तो सब घर पर ही थे....."पनीता"......"सुवन" से माँफी माँगने को बैचेन थी.....पर उसे "सुवन" को कॉल करने का मौका ही नहीं मिल पा रहा था!! वो चुपचाप छत पर जाती है और "सुवन" को कॉल मिलाती है...............हैलो "पनीता" कैसी हो? और आज रविवार है फिर तुम मुझे कैसे कॉल कर रही हो? 
"पनीता".......... मैं..........ठीक नहीं हूँ......... "सुवन" पूरी रात सो नहीं पायी, यार हो सके तो मुझे माँफ कर देना, मेरी वजह से ही पापा ने तुमको कितना उल्टा सीधा बोला....मैं कुछ ना कर सकी, इतना बोलते ही "पनीता" फूट-फूट कर रोने................................. लगी ........"सुवन"......"पनीता" को समझाते हुए कहता है कोई बात नहीं यार, अंकल बड़े हैं, उन्होंने जो कुछ भी बोला गलत नहीं बोला, मैं भी तुम्हारे प्यार में अपनी हैसियत भूल गया था.....इतना ही बोलते ही "सुवन" भी रोने लगता है......." पर यार अब मैं जीते जी तुम्हारा ही रहूँगा।
                " पनीता" को ढूँढते 2 उसकी माँ कमला देवी छत पर पहुँच जाती हैं.....वो "पनीता" को फोन पर बात करते हुए देखकर पूछती हैं कि तू किससे बात कर रही है यहाँ छत पर आकर?? "पनीता"........... माँ किसी से नहीं !!...."कमला देवी" थोड़ा सख्त लहजे में पूछती हैं.......कि बता दे, नहीं तो मैं अभी तेरे पापा से कहती हूँ....... "पनीता" डर के मारे माँ "सुवन" से कर रही थी!!पर माँ आप पापा से कुछ न कहना,.....माँ "सुवन" बहुत अच्छा लड़का है....और मैं उससे प्यार करती हूँ........."कमला देवी" "पनीता" तू जानती है क्या कह रही है तू??.......प्यार कोई खेल, मज़ाक नहीं, जो किसी से भी किया जाए, प्यार अपने बराबर वालों से करना चाहिए!!पर माँ " सुवन" में क्या कमी है, बस वो ज्यादा पैसे वाले ही तो नहीं हैं?.......मैं शादी करूँगी तो सुवन से ही करूँगी........"कमला देवी चुपचाप पनीता को लेकर नीचे आ जाती हैं"।
                    रात को सोते हुए "कमला देवी" "अनूप जैन" से........"देखो जी मुझे "सुवन" का अपने घर ज्यादा आना जाना अच्छा नहीं लगता, "पनीता" भी "जवान हो रही है"...." अनूप जैन"......लम्बी साँस लेते हुए ठीक कहती हो पनीता की माँ......"मुझे लगता है कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है" कल जब तुम अपनी बहन के यहाँ गयीं हुई थीं, और मैं भी मुम्बई जा रहा था, पर जरूरी मीटिंग की वजह से एअरपोर्ट से वापस आ गया तो देखा कि "तुम्हारी बेटी दुल्हन की तरह सजी हुई थी" और  "सुवन" "उसके बैडरूम में उसके बैड पर लेटा हुआ था"!! चलो तुम "पनीता" पर ध्यान रखो.....मैं भी कुछ सोचता हूँ,..... कहकर अनूप जैन सो गये, पर कमला देवी के कानों में पनीता की कही बातें गूँज रहीं थीं ।
                    अनूप जैन अपनी फैक्टरी में अपने ऑफिस में बैठे "सुवन" और उसके परिवार को किसी भी तरह अपने घर और कॉलोनी से दूर करने के बारे में सोचने लगते हैं । "शाम को सारा स्टाफ ड्यूटी करके अपने घर चला जाता है, फिर भी वो अपने ऑफिस में बैठे सोचते रहते हैं" तभी "उनके दिमाग में एक ""घिनौनी"" योजना आती है" और वो फैक्टरी के कैश से एक लाख रुपये निकाल लेते हैं ( जिसका वो कोई वाउचर भी नहीं भरते).... फैक्टरी कैश से जितना भी कैश " अनूप जैन "को निकालना होता था तो उसका पहले उन्हें वाउचर भरकर देना होता था.....एकाउन्ट्स का काम "सुवन के पिता देवकी नंदन ही देखते थे"
                    अगले दिन " अनूप जैन" फैक्टरी में जाते ही "देवकी नंदन" को अपने ऑफिस में बुलाते हैं और बिल पेमेंट की फाईलों और और टोटल कैश की डिटेल लाने को कहते हैं....."देवकी नंदन" पिछले 20 साल से " अनूप जैन की फैक्टरी में ही नौकरी कर रहे थे, और अनूप जैन पूरे स्टाफ को देवकी नंदन की ईमानदारी की मिसाल देते नहीं थकते थे.....जब कभी भी अनूप जैन ने हिसाब चैक किया....एक-एक रुपये का हिसाब मिल जाता था....."देवकी नंदन" आज भी सारे पेपर अनूप जैन के सामने रखते हुए....सर कर लीजिए चैक!!  "देवकी नंदन को क्या पता था कि तेरे लिए क्या चाल चली जा रही है"....."अनूप जैन"........"देवकी नंदन"....." क्या एक लाख रुपये तुमने निकाले हैं??....... देवकी नंदन नहीं सर मैंने तो आज तक एक रुपया भी आपसे पूँछे बिना नहीं लिया है......तो एक लाख कहाँ गया?..... सर मुझे कुछ नहीं पता....कैश की एक चाबी आपके पास भी रहती है कहीं......आपने......तो....... अनूप जैन चुप........उल्टा चोर कोतवाल को डाँट रहा है....अब सीधा 2 बता रहे हो या पुलिस को बुलाऊँ??  देवकी नंदन पसीनों में नहा जाते हैं कि मुझे आज मेरी ईमानदारी का ये ईनाम मिल रहा है, वो अनूप जैन के पैर पकड़ लेता है और कहता है सर आप पुलिस कम्पलेंट ना करें, मेरे सुवन का कैरियर खराब हो जाएगा.....ठीक है नहीं करूँगा, पर मेरी एक शर्त है कि तुम अपने परिवार को लेकर और किसी कॉलोनी में चले जाना और कभी भी मेरे घर की तरफ ना झाँकना....ठीक है सर......... कहते हुए देवकी नंदन अपने आँसुओं को पूछते हुए अपने घर की तरफ चल देते हैं।
                   देवकी नंदन जैसै तैसै घर पहुँचते ही पलंग पर लेट जाते हैं...."कामता देवी पानी का गिलास लेकर देवकी नंदन के पास पहुँचकर पूंछती हैं" कि "सुवन के पापा आपकी तबियत ठीक नहीं, जो आप जल्दी आकर यहाँ लेट गए".....इतना सुनते ही देवकी नंदन की आँखों में आँसू डबडबाने लगते हैं.....कि "सुवन की माँ जैन साहब ने आज मुझे मेरी ईमानदारी का वो ईनाम दिया है जिसकी मैंने सपने में भी कल्पना नहीं की थी और मुझे सबके सामने अपमानित करके नौकरी से निकाल दिया", अब मैं किसी को अपना मुँह दिखाने लायक भी नहीं रहा , और जो भी हुआ सब कामता देवी को बता देते हैं........"" ये सब सुनते ही कामता देवी, गुस्से में खड़ी होती हैं कि मैं पूछकर आती हूँ कि हमने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा जो तुमने झूँठा इल्जाम लगाकर मेरे पति को अपमानित करके निकाला"".......सारी बातें "सुवन" भी सुन लेता है, और उसे सब समझ भी आ जाता है......""देवकी नंदन.....नहीं सुवन की माँ तुम उन घटिया लोगों के नहीं जाओगी....और हम जल्दी ही ये कॉलोनी ही छोड़ देंगे""।
                   "" इधर कमला देवी अनूप जैन से कहती हैं कि देखो पनीता के पापा आप जल्दी ही कोई अच्छा सा परिवार देखकर पनीता के हाथ पीले कर दो, क्योंकि "सुवन की निगाह हमारी प्रोपर्टी पर होंगी" और अब तो उसके पापा को भी आपने नौकरी से निकाल दिया है"" तो घर का खर्चा भी मुश्किल से चल रहा होगा!!"अनूप जैन सही कह रही हो पनीता की माँ"................
                     ""देवकी नंदन अपने परिवार के साथ दूसरी कॉलोनी में जाकर रहने लगते हैं""...."सुवन की माँ कामता देवी घर पर सिलाई करना शुरू कर देती हैं"...ताकि घर में रोटी पानी का खर्चा चल सके, "सुवन" भी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने शुरू कर देता है, पर कहीं भी ठीक सी नौकरी नहीं मिल रही है  
                      "पनीता को घर में जब भी मौका मिलता वो सुवम से बात कर लेती"....पर बातें बहुत कम हो पाती थीं, क्योंकि "कमला देवी हमेशा पनीता पर ही निगाह रखती थीं"...."पनीता को सुवन ने अपने पिता के साथ जो उसके पिता ने किया सब बता दिया था"..."पनीता ये सोचकर भी बहुत परेशान रहती थी कि मेरे प्यार की सजा सुवन के पापा को झेलनी पड़ी"..........""एक दिन पनीता सुवन को कॉल करके कहती है कि सुवन में घर छोड़कर आ रही हूँ""....और "हम दोनों कहीं दूर चलकर अपना घर बसाकर रहेंगे" "सुवन पनीता को समझाता है कि पागल ना बनो....मैं किसी काबिल हो जाऊँ फिर तुम जहाँ कहोगी हम चल देंगे"....."ये सारी बातें कमला देवी सुन लेती हैं" और "पनीता से फोन छीनकर जमीन पर मारकर तोड़ देती हैं"  "जिससे सुवन और पनीता में फोन पर बातें होना भी बंद हो जाती हैं", और उसके सिम को अपने फोन में डाल लेती हैं.....जिससे सुवन की कॉल करने का उन्हें पता चलता रहे।
                    अचानक एक रात देवकी नंदन की तबियत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है......सुवन उनको लेकर हॉस्पीटल भागता है डाक्टर कहते हैं कि इनको ब्रेन हेम्बरेज हुआ है, और हमको इनके दिमाग का यथाशीघ्र ऑपरेशन करना पड़ेगा, अगर हम ऑपरेशन नहीं करते हैं तो कुछ भी हो सकता है,और ऑपरेशन में  करीब दस लाख रुपए का खर्चा आएगा.....सुवन सोच में पड़ जाता है कि वो इतने पैसों का इंतजाम कहाँ से, और इतनी जल्दी करेगा !!........"सुवन"..."पनीता" को कॉल करता है पर वो कैसे पिक करती उसका फोन कमला देवी ने तोड़ दिया था और उसका सिम अपने फोन में डाल लिया था........"सुवन लगातार फोन किए जा रहा था"......कमला देवी....अनूप जैन से कहती हैं कि देखो जी....."इस सुवन को रात में भी चैन नहीं है"...जैसे ही फिर फोन की घंटी बजती है.....अनूप जैन फोन पिक करके बोलते हैं कि "क्या चाहता है तू अभी तो तेरे बाप को नौकरी से निकाला है.....अब तुझे दिल्ली से बाहर फिंकवा दूँगा"......."सुवन अंकल मेरी बस एक बात सुन लो फिर आपको जो भी करना हो कर लेना"..."अनूप जैन"....."बोल क्या कहना है"?..... "सुवन" "अंकल" "पापा को ब्रेन हैम्बरेज हुआ है"...."डाक्टरों ने कहा है कि अगर उनका ऑपरेशन नहीं हुआ तो उनका बचना मुश्किल है, प्लीज अंकल मेरे पापा को बचा लो कहकर वो रोने लगा"..... "अनूप जैन"...... "ठीक है मैं सुबह तुमको हॉस्पीटल के बाहर मिलता हूँ" पर  तुमको मेरी कुछ शर्त माननी होंगी...."सुवन अंकल आप जो भी कहेंगे मैं सब मान लूँगा".......ठीक है मैं सुबह मिलता हूँ कहकर फोन काट दिया ।
                      सुबह अनूप जैन हॉस्पीटल पहुँच जाते हैं.... और सुवन से पूछते हैं कि कितने रुपए चाहिए अॉपरेशन के लिए??....."सुवन नजर नीचे किए हुए"...."अंकल दस लाख"....."अनूप जैन अपना ब्रीफकेस खोलकर उसमें से पन्द्रह लाख रुपए निकाल कर सुवन के सामने रख देते हैं"  "एक पेपर साइन करने को कहते हैं कि रुपये चाहिए तो इस पेपर पर साइन कर दो".... "सुवन उस पेपर को पढ़ता है जिसमें लिखा होता है कि मैं  कभी पनीता से कभी नहीं मिलूँगा, ना ही कभी उसके सामने आऊँगा, ना कभी किसी भी तरह से उससे सम्पर्क करूँगा"......एक बार तो सुवन सोच में पड़ जाता है कि क्या करूँ?? अगर ऑपरेशन नहीं हुआ तो पापा मर जायेंगे, और साइन कर दिए तो पनीता सोचेगी कि मैंने उसे धोखा दिया है.......पर वो पहले अपने पापा को बचाना चाहता है और पेपर साइन कर देता है, और कहता है कि अंकल "ये रुपया आपका कर्ज है मुझ पर".................
                        अनूप जैन अपने घर आकर ये अफवाह फैला देते हैं कि "सुवन" की एक्सीडेंट में मौत हो गई है, "पनीत" जैसे ही ये सुनती है वो बेहोश हो जाती है.....थोड़ी देर बाद उसे होश आता है तो घर में रखी एक कैमिकल की केन उठाकर उसमें से कैमिकल पी लेती है और रोते 2 कहती है कि "सुवन" मैं जीते जी भी तुम्हारी थी......अब मरने के बाद भी तुम्हारी ही रहूँगी.....और फिर बेहोश हो जाती है।
                      अनूप जैन उसे लेकर हॉस्पीटल भागते हैं, .....डाक्टर पूरा चैकअप करने के बाद बताते हैं कि कैमिकल की वजह से इसकी एक किडनी डैमेज हो गई है और दूसरी पर भी इसका असर हुआ है ।"अनूप जैन डक्टर के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं कि डाक्टर साहब चाहे कितना भी पैसा ले लो पर मेरी बेटी को ठीक कर दो"!!  मेरे घर की इकलौती ये ही संतान है, "डाक्टर.....जैन साहब हम अपनी तरफ से अच्छे से अच्छा ट्रीटमेंट दे रहे हैं" पर एक किडनी ट्रांसप्लान्ट करनी पड़ेगी तभी इसकी जिंदगी बच सकती है ।
                          "कामता देवी"...."सुवन" बेटा उठ तुझे तो " राज" के पास हॉस्पीटल जाना था......हाँ माँ जाना है " रमन" भी इंतजार कर रहा होगा कि मैं वहां जाँऊ तो वो आज घर चला जाए.... कहते हुए सुवन उठकर तैयार होकर हॉस्पीटल के लिए निकल जाता है ।
                       हॉस्पीटल पहुँचकर "सुवन" " राज के पास जाकर उसका हाल चाल जानता है, पर उसके दिमाग में पनीता को लेकर भी उथल पुथल चल रही होती है कि मैंने "अनूप जैन से  पनीता से ना मिलने का वायदा किया हुआ है"...पर वो उसे इस हाल में होने के लिए खुद को ही दोषी मानता है.......वो ये सब सोचते 2...हॉस्पीटल इन्चार्ज के पास जाता है कि यहाँ एक पेसेन्ट को किडनी की जरूरत है....उसे "मैं अपनी किडनी देना चाहता हूँ " और मुझे उसके बदले कुछ नहीं चाहिए बस "मेरी एक शर्त है कि पेसेन्ट और उसके घर वालों को ये पता नहीं चलना चाहिए कि ये किडनी किसने दी है"! 
                      "इंचार्ज सुवन की बात सुनकर सोच में पड़ जाता है कि ये कैसा इन्सान है जो बिना लालच के और बिना अपना नाम किये अपनी किडनी देने को तैयार है"?...... "इंचार्ज तभी अनूप जैन को कॉल करके ये खुशख़बरी देता है कि किडनी देने वाला मिल गया है"....पर उसकी एक शर्त है कि आप किसी से वो मिलेगा नहीं ना ही अपने बारे में कुछ बतायेगा, और ना ही उसको............... किडनी के बदले एक भी रुपया चाहिए ......"अनूप जैन भी इंचार्ज की बात सुनकर सोच में पड़ जाते हैं कि ये सच में कोई इंसान नहीं फरिश्ता होगा"....."अनूप जैन इंचार्ज से कहते हैं कि हमें तो किडनी चाहिए तो हमें उसकी शर्त मंजूर हैं "।...."इंचार्ज सुवन से कहता है कि तुमको 15दिन यहीं हॉस्पीटल में रहना पड़ेगा" ।
                    सुवन अपनी माँ कामता देवी से झूठ कहता है कि माँ मुझे एक कम्पनी में नौकरी मिल गयी है और मुझे ट्रेनिंग के लिए कल बंगलौर जाना है.....माँ यह सुनकर खुश होती है कि सुवन को नौकरी मिल गयी है..... पर उनको क्या पता कि सुवन """"प्यार का कर्ज""""उतारने के लिए अपनी किडनी देने जा रहा है ।
                   अगले दिन "सुवन" हॉस्पीटल पहुँच जाता है.... डाक्टर उसके सारे चैकअप करते हैं और किडनी देने सम्बन्धी पेपर्स पर साइन कराकर सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2 दिन बाद किडनी ट्राँसप्लान्ट की डेट दे देते हैं ।
                   दो दिन बाद ऑपरेशन थियेटर में एक बैड पर पनीता लेटी होती है और कर्टेन की दूसरी तरफ सुवन लेटा होता है......दस घंटे ऑपरेशन चलता है, आपरेशन के बाद डाक्टर बाहर आकर अनूप जैन को बधाई देते हैं कि ऑपरेशन सफल रहा है और अब आपकी बेटी जिंदा रह सकेगी ।
                   सात दिन बाद "पनीता" को हॉस्पीटल से छुट्टी दे दी जाती है, पर " सुवन" को अभी छुट्टी नहीं दी जाती है । 5 दिन बाद "पनीता" रुटीन चैकअप को अपने पापा अनूप जैन के साथ हॉस्पीटल जाती है तो उसको कोई भी डाक्टर दिखाई नहीं देता तो वो वहाँ स्टाफ से डाक्टर के बारे में पूछती तो वो बताते हैं कि जिसने तुम्हें अपनी किडनी देकर तुम्हारी जान बचाई है, उसकी हालत ख़राब है और सारे डाक्टर उसी के पास लगे हुए हैं ।
                   " पनीता" की नजर डाक्टरों पर पड़ती है तो वो भी वहीं पहुँच जाती है, और वो भी उसका चेहरा देखना चाहती जिसकी वजह से उसे नयी ज़िन्दगी मिली है..... जैसे हीे वो झाँककर देखती है एकदम उसकी चीख निकल जाती है.......भागकर अनूप जैन भी पनीता के पास पहुँच जाते हैं और पनीता को संभालते हुए...... "क्या हुआ पनीता"?...... ""पनीता रोते हुए....पा.... पा..... "सुवन"" !!
कहाँ है "सुवन" ?.................
पनीता उँगली से इशारा करते हुए कि ये ही वो देवता है जिसने मुझे अपनी किडनी दी है...... "अनूप जैन की आँखों में भी आँसू आ जाते हैं "और "सुवन" के पैर पकड़ लेते हैं........पनीता सुवन के सिर के पीछे खड़ी रोये जा रही है......उसके आँसू "सुवन" के गालों पर गिरते ही सुवन एक दम आँखें खोल देता है ।
                      अनूप जैन "सुवन" से माँफी माँगने लगते हैं...... पर सुवन कहता है कि अंकल आप भी मेरे पिता समान हो मुझे शर्मिंदा न करो, 
                        "अनूप जैन पनीता और सुवन को लेकर सीधे देवकी नंदन के घर जाते हैं" और उनके पैर पकड़ लेते हैं कि आपकी ईमानदारी को मैंने ही झूठ बोलकर बदनाम किया मुझे माँफ कर दो...."देवकी नंदन....अनूप जैन को गले लगा लेते हैं"....."अनूप जैन अपनी फैक्टरी देवकी नंदन के नाम कर देते हैं" कि आज से आप ही फैक्टरी के मालिक हो........"अनूप जैन सुवन को अपने पास बुलाकर कहते हैं " कि "सुवन बेटा आज मुझे भी तुमसे कुछ माँगना है"...... "हाँ अंकल बोलो"...... "अनूप जैन आँखों में आँसू भरकर कहते हैं कि मुझे इस घर की खुशियाँ दे दो, मैं " तुम्हारे ""प्यार का कर्ज"" कभी नहीं उतार पाऊँगा" और ""पनीता का हाथ सुवन के हाथों में थमाकर कहते हैं आज से ये तुम्हारी है"" "सुवन पनीता को अपने सीने से लगा लेता है" और ""पनीता की शादी सुवन से धूमधाम से कर दी जाती है""।
समाप्त....................   




पवन कुमार शर्मा