ऐ साहिल मेरे,
तुम चाँद तारे तोड़ कर लाओ,
ऐसी ख्वाहिश नहीं मेरी!
तू मेरे साथ निभा ले यह जीवन,
बस यही हसरत रखती हूँ!!
तेरे सीने से लगकर सुकूँ पाऊँ,
जन्नत करूँ तेरे ईट पत्थर के मकां को,
रहूँ संग हर घड़ी हम कदम,
बस मन्नत रखती हूँ!!
तू दोस्त मेरा, हमसफर जाने जाँ,
मुझे इतनी मुहब्बत देने के लिए,
तेरा शुक्रिया, तूने मुझे हर तरह से,
मुकम्मल कर दिया!!
कोई खवाहिश ना रहने दी अधूरी मेरी,
मुहब्बत के मायने भी तुमने बताया,
मेरी चंचलता और मुस्कान को,
तुमने मायूस नहीं किया!!
दोस्त, प्रेमी और हमसफर, ये
तीनों किरदार तूने बखूबी निभाया!!
तेरी पनाह में रौशन कर सकूँ, चमन तेरा,
ईश्वर से यही स्तुति करती हूँ!!
श्वेता कर्ण

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