अंतर्मन में जब उठे,
लहर तेरे प्यार की।
यौवन से महकने लगें
अंग-प्रत्यंग सभी।
याद में तुम्हारी सुरमई,
साँझ सजने लगी।
मन में तेरे प्यार की,
कलियाँ खिलने लगी।
प्रेम में तेरे मैं
चिड़िया सी चहक उठी।
काली रात में तेरे सपनें
सजाने मैं लगी।
प्रेम में तेरे
बौराई सी होने लगी।
आ जाओ प्रिय,
अब सांस थमने लगी।
गरिमा राकेश गौतम
कोटा राजस्थान

0 टिप्पणियाँ