कहानी का मोड़ आ चुका था। दोनों बहुत हस रहीं थी। और हैरान भी थीं। निशांत का झुकाव रिया की तरफ था इसलिए दीप्ति पीछे हटना ठीक समझा और दोस्ती निभाई। दीप्ति ने निशांत का पूरा नाम पता किया और रिया को बताया।असली नाम और सरनेम जानकर डिक्शनरी में नंबर पता किया। और 5....6 रोगं नंबर लगाने के बाद जब फोन लगा । मगर निशांत ने फोन नहीं उठाया।
शाम को रिया अपनी सहेली पारूल के घर खिड़की पर खडी़ थी। तभी उसे सामने से निशांत की कद काठी का अक्स आता हुआ नज़र आया।
उस वक्त तकरीबन पौने 5 बजे थे। उसे देखकर रिया के दिल की धड़़कन तेज हो गई।
रिया ने जल्दी दीप्ति और पारूल को आवाज लगाई अरे जल्दी आओ वो निकल जाएगा।
दो घंटे तक तो रिया के दिमाग से निशांत का सरूर ही नहीं उतरा था। वही मासूम सा चेहरा और दबी सी मुस्कान उसके मुंह पर। और रिया निशांत के वापसी तक रिया खिड़की में खड़ी रही।
रिया उसे तब तक देखती रही जब तक वो आंखों से ओझल नहीं हो गया। और रिया ने निशांत की टीशर्ट पर उसका लिखा हुआ नाम पढा़।
दरअसल निशांत वो टीशर्ट पहन कर रोज क्रिकेट खेलने जाता था।
अब तो उसे निशांत के रोज वहाँ से निकलने का वक्त पता चल चुका था। रिया रोज पारूल के घर की खिड़की से निशांत के आने का इंतजार करती।
अब तो निशांत भी सजसंवर के निकलता। और रिया को भी अब सुंदर दिखना था। वो भी तैयार हो कर खड़ी रहती। दोनों की नज़रें मिलती। शर्रमाने और मन ही मन मुस्कुराने का सिलसिला होता। अब ये मौन प्यार खूब परवान चढ़ रहा था।।।
क्रमशः।।।
❤मनु✍🏻

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