मेरी प्रेम कहानी का तुम किरदार बनोगी क्या
मैं नायक बन जाऊँ तुम नायिका बनोगी क्या
मेरे दीवानेपन की तुमको खबर नही साहिब
मैं शफ़ीना बन जाऊँ तुम नदी की धार बनोगी क्या
मैं मोमबत्ती सा खुद जलता और पिघलता हूँ
मैं मोम बन जाऊँ तुम बाती की लौ बनोगी क्या
मेरी डायरी के पन्नो पर कुछ अधूरापन सा है
मैं कागज बन जाऊँ तुम कलम बनोगी क्या
अपने सपनो में अक्सर तुमको ही पुकारा करते है
मैं कल्पना बन जाऊँ तुम मेरी हकीकत बनोगी क्या
मैं मस्त मलंग फकीरा सा अपनी मौज में रहता हूं
मैं साधु बन जाऊं तुम मेरी कुटिया बनोगी क्या
मैं बचपन से ही बुरा हूँ मुझमें ऐब हज़ारों है
मैं कीचड़ सा हूँ तुम कमल बनोगी क्या
मेरे दिल मे दफ़न सदियों से दर्द हज़ारों है
मैं तुमको सब बतलाऊँ तुम चुपचाप सुनोगी क्या
शुभेन्द्र सिंह संन्यासी

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