समुंदर की गहराई से भी गहरी है मेरे दिल की गहराई
कौन उतरेगा इस गहरे मन के समुंदर में
नही माप पाओगे मेरे दिल की गहराई को
जो कोशिश भी की तो खुद ही डूब जाओगे।
सभी को तो दिखता है मेरा गुस्सा
प्यार कहाँ दिखाई देता है किसी को
सभी तो देखते हैं ये सूरत हमारी
मन मे कहाँ झाँक पाया कोई।
हम हँसते रहे वो हमें खुश समझते रहे
न हम कभी कह सके कुछ
न वो जज्बात पढ़ पाए हमारे
हम आँसुओं के समंदर से मन को भरते रहे।
जिसने भी देखा वो न जान पाया हमारी तकलीफें
सभी को तो हम बस मस्ती में चूर लगते रहे
जिसको भी चाहा टूट कर हमने
वो दिल के हजार टुकड़े करते रहे।
अपनों ने भी जरिया समझा दिल लगाने का
तो गैरों ने भी बस चाहा मन बहलाने को
हम सभी के लिए एक रास्ता बनते रहे
जिस पर से हो वो मंजिल पर पहुँचते रहे।
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ॐ नमःशिवाय
कोमल भलेश्वर
हरियाणा

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