जीवन किसके हाथ में
न हमारे, न आपके
अध्यात्म कहता
कोई अज्ञात शक्ति
जिसने दुनिया बनायी
वही जीवन देता
जिदगी छीन भी लेता
जीव एक पथिक
चलता रहता
कभी रुक जाता सराय में
वही उसका जीवन
फिर निकल लेना निज पथ पर
मृत्यु कहलाती
विज्ञान अलग कहता
श्वास ले रहा प्राणी
हृदय की धड़कन
यही जीवन है
जब बंद हो जातीं दिल की धडकनें
श्वास बंद
मृत्यु हो गयी
जिंदगी हाथ में तो नहीं बताते
मुझे लगता कुछ अलग
कौन जिंदा
कौन मृतक
श्वास और दिल धडकने से अलग
कैसे जीवन नहीं
आज भी अनेकों महान
जी रहे हमारी यादों में
अनेकों जिंदा भी
मरे ही हुए लगते मुझे
आचरण हीन
दुनिया को मिटाने की चाह रखते
बेटियों की इज्जत से खेलते
देश रूपी माॅ को छलनी करते
संप्रदाय की अग्नि जलाते
विद्वेष उपजाते
कब जिंदा है
श्वास ले रहे मृतक ही
हाॅ सच ही है
जिंदगी हमारे हाथ में
शरीर मिट जायेगा
श्वास छूट जायेगी
धड़कन बंद हो जायेगी
फिर भी न हो मृत्यु
हमारे हाथ में
कुछ अलग कर दिखाओ
विश्व प्रेम की अलख जगाओ
देश पर मिट दिखाओ
सार्थक परिवर्तन लेकर आओ
हमारी जिंदगी हमारे हाथ में
मरेंगे नहीं कभी भी
अमर हो जायेंगें
राम, कृष्ण, ग गौतम, गांधी
नाम कितने गिनाऊं
आज भी जी रहे हैं
अमर हो सकते हम भी
जिंदगी हमारी, हमारे हाथ में
रचनाकार : दिवा शंकर सारस्वत 'प्रशांत'

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