सपनों में भी बेटी के दर्द का।
एहसास हो जाता है।
फोन पर दूर से ही उनकी आवाज के।
अंदाज का पता चल जाता है।
जो दिल की धड़कन है।
ज़रा सा बैचन हो तो।
उसका एहसास हो जाता है।
गुस्सा प्यार बैचैनी।
उनके व्यवहार से दिख जाता है।
जानबूझकर रूठ जाती है।
सारा घर बेजान कर देती है।
ज़रा सा गूदगुदा दो।
पूरा घर उनकी हंसी से खिल जाता है।
नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया )🌹🌹
दिल्ली

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