क्लास में एगो नया क्लास भेटाईल
केहू कहे मध्यम, केहू मिडिल कहाईल।
आवा ओकर आज हम हालत बतावत हई
ओकर साथे हमहुँ आपन दुखड़ा सुनावत हई।
होखते पैदा जे रेस में लग जाला
उहे त भाई मिडिल क्लास कहाला
कहाँ से होई पढ़ाई लिखाई.....
कहाँ से चली कल के खर्चा पताई
जहवाँ इहे सब रोजे सोचाला....
इहे त भाई मिडिल क्लास कहाला...
जुहावत पूरी ज़िंदगी ...जुहावते बीते जाला..
करब कइसे बिटिया के शादी सोच के जी घबराला...
कहाँ से भराई बिजली पानी के खर्चा...
करी का अईसन पड़ोसी न करे बुराई..
न करे उ चर्चा।
समाजे के भय से न जियले जियाला...
इहे त भाई मिडिल क्लास कहाला....
सपना तो बड़का बहुत बड़का देखाइल..
होइ सफ़ारी , मर्सडीज सोचाईल...
मगर रोटी जुहावल बहुत हो जाला भारी
कहाँ से किनाई टाटा ,मोटर ,सफ़ारी...
जेहवा पूरा परिवार एकसाथ रहाला..
उहे त भाई मिडिल क्लास कहाला...
वर्तमान में मिडिल क्लास की स्थिति......
आईल कोरोना भईल परेशानी....
न जाने ससुरा इ केतनन के मारी
अ लगते लॉकडाउन भईल आफतमारी...भारी
घरे में रहा संगे एगो नारी...
जे रोजे बदहाली के रेडियो सुनावेले।
चलल जाईब नईहर हमके डरावले...
अब त जीवन न जियले जियाला..
उहे त भाई मिडिल क्लास कहाला
अमीरन के तनिको न रहल कमी...
गरीबन के बदे त बांटे सभी...
मिडिल क्लास के हालत त..
केहू से पुछलो न जाला..
इहे त भाई मिडिल क्लास कहाला..
चावल , दाल, और तरकारी...
घरे के किराया देवल बा भारी...
महंगाई बा अईसन कि बड़ले ही जाता.
रोजो क थाली हमार गड़बड़ाता.
आवत बा त्योहार कइसे मनाई..
किनी कपड़ा कि घर रंगाई...
ले ले हई लोन न भरले भराला..
इहे त भाई मिडिल क्लास कहाला...
बेटा के पढ़ावल भइल बारे भारी...
बड़का के पढ़ावली पर बाटे बेरोजगारी..
सगरो प्राइवेट के रट लगाता..
मिडिल क्लास के हालत बिगड़ते ही जाता..
आईल चुनाव अब होई तमाशा...
हर केहू देई अब हमके दिलासा...
पर हमरो न दिक्कत , केहू से समझे समझाला
उहे त भाई मिडिल क्लास कहाला...
सर्वेन्द्र मिश्र (विरक्त)

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