मैं सेतु हूं
दो पीढ़ियों के अंतर को
मैं पाटती हूं
बुजुर्गों और बच्चों को
मैं समझती हूं
दोनों की तकरार को
मैं ही विराम देती हूं
मैं सेतु हूं
अपनी जिम्मेदारियों को
बखूबी मैं समझती हूं
पिता-पुत्र के बीच
मैं ही वार्तालाप बनती हूं
दोनों को समझने और समझाने की
कोशिश मैं ही तो करती हूं
फिर भी सुनने को मिलता है
'तुम बच्चों को कुछ कहती नहीं हो'
या फिर, 'तुम ने इन्हें बिगाड़ रखा है'
'मम्मी, आप पापा जी से कहो ना'
'मम्मी, आप लोग कुछ समझते नहीं हो'
मैं सेतु सी
झूलती हुई मुस्कुराती हुई
अपने आंसू छुपाती हुई
सबको साथ लेकर चलती हूं
थोड़ा इसको तो थोड़ा उसको
शांत करती हूं
यही तो मेरा जीवन है
मैं सेतु हूं, मैं स्त्री हूं ।

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