चुन्नू और मुन्नू दो  जुड़वां भाई थे,वे अपनी मां के साथ रहते थे,पिता का साया उन के जन्म के बाद ही उठ गया था। मां मेहनत मजदूरी कर उनका भरण पोषण कर रही थी,चाहती थी कि दोनो पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी करें।

दोनो बहुत फुर्तीले और तीव्र बुद्धि के थे। ,मां उन्हें दूध देती तो दोनो में रेस रहती , कि कौन पहले दूध घटक जाएगा, फिर दूध से बने एक दूसरे की मूंछें देख दोनो खूब हंसते।

स्कूल कुछ दूरी पर ही था,इसलिए वे दोनो पैदल ही चले जाते।

उनका एक दोस्त था,संजू ।संजू बड़े घर का बेटा था,उसे स्कूल छोड़ने के लिए  एक चमचमाती कार आती थी।वो राजकुमार की तरह रोज स्कूल कार से उतरता ,तो सबकी आंखें उसके कार को निहारती।
सब बड़े बड़े उम्र के लड़के उसके दोस्त थे।


कितनी अच्छी लप लपाती कार है__चुन्नू मुन्नू भी आंखें गोल गोल घुमाते देखते ।

एक दिन जब संजू कार से उतरा तो चुन्नू मुन्नू ,लालची सियार की तरह कार के आस पास घूमने लगे, उसे छू छू कर देख रहे थे।

संजू हंसा ,क्यों?? क्या तुमलोग भी मेरे साथ कार में घूमोगे?
दोनो ने एक साथ कहा _ हां, हां,तुम कितने अच्छे हो।
उस दिन तीनों ने स्कूल की छुट्टी कर ली।खूब घूमे ,बाजार में जाकर अच्छे अच्छे पकवान,जंक फूड(ऐसा खाना जिसमे पोषक तत्व न हो) खाए।संजू ने कहा ,मजा आया।
उन दोनो ने कहा _ हां ,बहुत मजा आया,संजू तुम कितने अच्छे हो,तुम्हारे जैसे दोस्त पाकर हम तो धन्य हो गए।
संजू ने कहा _ हमलोग सप्ताह में तीन दिन क्लास करेंगे और और 3 दिन घूमेंगे ,फिरेंगे,क्यों सही है न।
हां हां ,एक दम सही कहा तुमने दोनो एक साथ बोल उठे।


अब चुन्नू मुन्नू  रोजाना मां से पैसे मांगने लगे,दूध अब उन्हें जहर लगने  लगा। मां जो बनाती वो नही खाते । मां बहुत परेशान थी।स्कूल का काम भी पूरा नहीं करते ,अब तो स्कूल से शिकायत आने लगी।

दोनो मोटे ,और आलसी होते जा रहे थे। इधर मां अब सवाल पूछती कि क्यों तुम्हे पैसे चाहिए तो  अब वे पैसे चोरी करने लगे।

एक दिन  संजू  ने उन्हें मेले देखने के लिए उकसाया ,दोनो घर से बचाए पैसे लेकर मेले के लिए निकल लिए। 

शाम को जब वापस लौटे ,तो मां बिस्तर पर पड़ी खांस रही थी,उसकी बहुत तबियत खराब थी।दोनो घबरा गए।

जल्दी से डॉक्टर को बुलाया,डॉक्टर साहब बहुत अच्छे थे,उन्होंने फीस तो नहीं ली उनकी हालत देख कर,लेकिन कुछ दवा  उन्होंने लिख दिया।

उनके शौक ने  घर में एक पैसा भी नहीं  रख छोड़ा था, कि दवा ले आ सकें। सबके पास जाकर उन्होंने मदद की गुहार लगाई ,लेकिन किसी ने मदद नहीं की।


अंत में उन्होंने सोचा की _क्यों न संजू से मांग लूं।वो जरूर मदद करेगा।
वे संजू के घर की ओर भागे,संजू के पिता का पारा उन दोनों को देखते ही चढ़ गया।क्योंकि संजू इस बार क्लास में फेल था ,संजू ने सारा आरोप  चुन्नू और मुन्नू पर लगाया था।उन्होंने अपने नौकर से कहा ,_रामू इन दोनों पाजियों पर कुत्ते छोड़ दो,इनकी वजह से मेरा संजू बरबाद हो रहा है। नौकर आगे बढ़ा ही था कि
 दोनों सरपट घर की ओर भागे।


घर पहुंचकर दोनों,जोर जोर से रोने लगे उन्हें अपनी गलती का अहसास हो रहा था।

लेटी लेती मां उन दोनों को देख रही थी,उन्हें अपने पास बुला कर बोली,तुम्हे अपनी गलती का अहसास हो गया, कि चोरी करना कितना बड़ा पाप है,मुझे तुमलोगों के बदले व्यवहार को देख शक हो गया था ,इसलिए मैने कुछ पैसे तुमलोगों के पिता  की तस्वीर के पीछे छुपा दिया था।,जाओ वहां से ले लो। मां ने आगे कहा।_____तुमलोगो को  अपनी पढ़ाई से ज्यादा , इस चमक दमक की दुनिया में मजा आने लगा था ,जो कुछ दिनों का तुम्हारा भ्रम था,वो आज टूट गया।

बिना पैसे के लोग ,तुरंत  किनारा कर लेते हैं।
इसलिए मन लगा कर पढ़ाई करो ,और बड़े आदमी बनो,दिल से भी और दौलत से भी।

दोनों जल्दी जल्दी मां के लिए दवा ले आए, मां की  बहुत सेवा की ।दो तीन दिन में मां ठीक हो गई।
अब चुन्नू मुन्नू एक दम बदल चुके थे,उन्होंने  अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगाना शुरू किया,और संजू जैसे बच्चों से किनारा कर लिया।
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                   समाप्त

स्वरचित_संगीता