चारों वेद का ज्ञाता रावण,
महापंडित का ज्ञानी था।
अपने शौर्य बल के कारण,
विश्वविजय तक भारी था।
बहन की खातिर रावण ने,
आक्रोश अपना दिखाया था।
छल बल करके ही सही,
सिया का हरण कर लाया था।
पृथ्वी पर मानव वेश में,
नियति के हरि को आना था।
फिर भी अपनी जिद के कारण,
अपने कुल को भी तारणा था।
ऐसा सुअवसर फिर जीवन में,
रावण को नहीं फिर मिलना था।
चारों वेद का ज्ञाता रावण,
महापंडित का ज्ञानी था।
✍️लक्ष्मीनारायण
देवरी कलां
जिला सागर मध्य प्रदेश।

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