खुशियों की रसधार हो तुम,
निर्मल गंगा की धार हो तुम,
आंँखों में प्यार झलकता है,
 दिल में जिसके रब बसता है,
मेरे मन का उद्गार  हो  तुम,
मझधार में भी पतवार हो तुम।।
हर शब्द दुआ बन जाता है,
कोई गम पास नाआता है,
हर सुख की उत्तम खान हो तुम,
मांँ ईश्वर का वरदान हो तुम।।
मांँ, प्रेम की तुम परिभाषा हो,
करुणा, ममता और आशा हो।
हर पल ,हर क्षण ,हर दिवस तेरा,
यह धरा, सृष्टि और व्योम तेरा,
तू जीवन की खुशबू का चंदन
मांँ तुझ को शत-शत बार नमन।। 



          सृष्टि के सभी मातृ शक्तियों को समर्पित
                                  मीनू' सुधा'