प्रेम रंग चूनरिया ओढ़ कर
पनघट पर बाट निहारूं मैं अपने पिया की
धड़कन जोरों से धड़कने लगी
दिल में आहट सुनी मनबसिया की
गोधूलि बेला में आए पिया
मैं प्रेम दीपक लिए आरती उतारूं रंगरसिया की
पिया ज्यों ज्यों और करीब आने लगे
त्यों त्यों प्रेम बादल घुमड़ने लगे
पपिहा कोयल मधुर संगीत गाने लगे
भंवरे भी गुंजार करने लगे
मोर हर्षित मन ठुमका लगाने लगे
कस्तूरी मृग कस्तूरी की सौंधी सौंधी खुशबू महकाने लगे
महिनों बाद सावन की देखो रूत आई
प्रकृति भी आंचल समेट मुझमें ही शरमाई
शर्माकर प्रेम सरिता आंखों में भर आई
नयन मोती थे छलकने को बेताब
पिया ने नयन मोती धरा पर गिरने ना दिया
लगा के अधरो से प्रेम पूर्ण आलिंगन किया
मिली जो प्यासी धरती आसमान से
प्रेम रंग दिल की गहराई में उतरने लगा
स्नेह बरखा में भीग गया तन मन
नस नस में प्रेम रंग बरसने लगा
मैं पिया की रंगरसिया की
रोम रोम में रंगरसिया मेरा पिया समाने लगा।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐

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