बस ढ़ाई अक्षर ही लिखे हैं प्यार के
अभी पतझड़ में आए हैं मौसम बहार के
सावन में दिल की दहलीज पर भीगना अभी बाकी है।।
अभी खुली है दिल की किताब
श्वेत कोरे पन्नों पर रंगीन सुनहरे प्यार भरे अक्षर लीखना अभी बाकी है।।
तन्हाई में कांटे ही कांटे बिछे थे राह में
अभी खिला है कमल प्यार का
दिल की कोमल कालीन पर होले होले चलना अभी बाकी है।।
शांत बैठे था जो भंवरा उपवन में
महीनों बाद आया है मौसम बहार का
दिल में बसी प्यार की बांसुरी पर गुंजार अभी बाकी है।।
डूब रहे थे जो शब्द बीच मझधार में
डूबती कलम को तिनके का सहारा मिला है प्यार में
गहरे पानी पैठ सागर की गहराई से शब्द मोती लाना अभी बाकी है।
गहरे अंधेरों में बैठे थे चुपचाप से
वर्षों बाद बुझते दीये को रोशनी मिली है पिंटू
वर्षों बीत गए काली अंधेरी रातों में
चीरकर अंधेरा नीलांबर में चम चम सुरज सा चमकना अभी बाकी है।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐

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