तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
इंसान इसमें दिखता नहीं
सब हिंदू - मुसलमान हैं ।

तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
किसान, मजदूर मरे सड़क पर
सरकार चुप साध है ।

तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
देवी जिसको कह रहे
इज्जत उसकी तार - तार है ।

तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
धर्मनिरपेक्ष भारत में अब
धर्म ही सरकार है ।

तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
देश को बेचने वाले अब
देश के चौकीदार हैं ।

तड़प रही इंसानियत सड़क पर
ये कैसा हिंदुस्तान है
भगत, अंबेडकर का देश है
मगर सब पाखंड के गुलाम हैं ।