ख्वाब, ख्वाहिशें, मुहब्बत, 
क्या करूँ लेकर! 
अकेलेपन में...! 
बेजार सी जिंदगी, 
बे रौनक सा दिल...! 
रेजा- रेजा बिखरते, 
तन्हाई में...!! 
कश्मकश की चादर, 
लपेटे तसव्वुर में...! 
महज कोरे सफ़हे, 
जिंदगी के...! 
हालात बयाँ करती, 
एक रूहानी मौजें, 
वफा की...!! 




  

श्वेता कर्ण