मातृत्व दिवस विशेष 

मां एक शब्द गहरा है
मां एक प्यारा पहरा है,
मां के आंचल की छांव में 
जीवन महफूज मेरा है !!!

मां के आंचल में देखे हैं
कई ख्वाब जीने के,
मां की ममता की बूंदों से
सजा संसार मेरा है!!!

राहों के जो कांटे है
वो फूलों से नजर आते,
मां की मुस्कान से
मेरे हर ज़ख्म भर जाते !!

जीवन की तपिश को भूलकर
आगे मैं बड़ती हूं,
मां के मखमली आंचल को जब
हाथों से छूती हूं!!!

भंवर में फस रही किश्ती
तूफानों का आलम है,
मां तुम ही साहिल हो 
मां तुम ही खैविया हो !!!

मां एक शब्द गहरा है,
मां एक प्यारा पहरा है 
मां के आंचल की छांव में
जीवन महफूज मेरा है !!!

स्वरचित , मौलिक,

     कीर्ति चौरसिया
     जबलपुर ( मध्य प्रदेश)