दिल की कालीन पर 
बिछाकर ईश्क की बिसात
वो चल गए धोखे की चाल
नादान ईश्क का घोड़ा 
जो पढ़ कर ढ़ाई अक्षर प्रेम के
बस ढ़ाई कदम ही चल पाया था
वो एक कदम चलकर ही घोड़े का शिकार कर गए
साथी थे जो ऊंट और हाथी वो भी देख कर दंग रह गए
फंसाकर ईश्क जाल में हां वो मूकर गए
दिल तोड़ कर हमें मारकर मुस्कुरा कर कह गए
वजीर से मोहब्बत थी हमें
तुम तो मोहरे थे ईश्क की चाल के
सुनकर ये शब्द महबूबा के
घोड़े के दिल को आराम मिला
सच्चे ईश्क में हमें कुछ ना मिला ना सही
शुकून है महबूबा की खातिर ईश्क में पिंटू प्राण न्यौछावर कर चला।।

पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏 💐💐