कुछ घटनाएं सुनियोजित होती हैं,जबकि कुछ अप्रत्याशित ढंग से होती हैं,और इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती है।
     जॉन अफ्रीका के दौरे पर था,उसे कुछ नया ढूंढना था,जिससे वो सर दर्द की दवा बना सके।
आज भी जड़ी बूटियों और वृक्षों की जितनी जानकारी आदिवासियों को है, उतना किसी विज्ञानी को नहीं । ईकॉलजिस्ट,और टैक्सोनोमिस्ट की मदद फार्मा कंपनियों को लेनी होती है।
जिससे वे नई दवा का इजाद कर सकें।

जॉन ने इस बार सोच रखा था कि इस बार मै आदिवासियों से मदद लूंगा।

जॉन अपने असिस्टेंट के साथ, अफ्रीका  के घने वर्षा वनों में पहुंचा। अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला बोल दिया,वे भागने लगे तभी,कुछ आदिवासि  उन्हें घुसपैठिया  समझ ,अपने सरदार के पास ले गए।
उनकी भाषा उन्हें समझ नहीं आ रही थी।लेकिन शुक्र था कि चलते वक्त उसकी कंपनी ने चुपके से दुभाषिए को पीछे से भेज दिया था। 
उसने ऐन वक्त पर पहुंच कर, सरदार को उनके आने का कारण बताया।
सरदार ने दो लोगों को उनके साथ भेजा ।वह एक ऐसे वृक्ष के पास उन्हें ले गया,जिसकी लंबाई 20 मीटर थी,तारे के आकार वाले फल उसमें लगे थे ,फूल पीले रंग के थे।
  जॉन ने फल तुड़वाया और उसे चख कर देखा ,जो कि शुरू में बहुत कड़वा लगा ,लेकिन बाद में मीठा लगने लगा।
इसे खाते ही मधुमक्खियों  ने जो  डंक मारा  था ,उसका दर्द भी ठीक हो गया।
  उन्होंने इस पेड़ से कोला नट और पत्तियां ढेर सारी तोड़ी,और वापस कैलिफोर्निया आ गए।
वहां आकर उन्होंने उसके केमिकल कंपोजिशन चेक किया।
जिसमें कैफिन - 2-3%
थियोब्रोमाइन  -1-2%
जो उतेजक का काम करता है। 
अब जॉन ने शुरू किया अपना प्रयोग , कोला नट और उसकी पत्तियों को मिला कर।
अचानक  जॉन  की पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण जॉन को घर जाना पड़ा,असिस्टेंट ने सोचा कहीं ये कहीं सूख के बर्बाद ना हो जाए,तो उसने उसे कार्बोनेटेड वाटर में ,डाल दिया।जो पेय बन गया।

असिस्टेंट बुरी तरह डर गया,।
जब जॉन वापस आया तो उसने उसे चखा ,तो कमाल का स्वाद लगा।
सर्वप्रथम इसे दवा की दुकान पर दिमाग को शांत करने वाले टॉनिक के रूप में रखा गया।
लेकिन बाद में इसे सॉफ्ट ड्रिंक के रूप में पूरी दुनिया के सामने रखा गया।
जिसके बिना हर पार्टी अधूरी है।      ........

स्वरचित_संगीता सिंह(स्रोत गूगल)