बैचेन,
मनवा मोर,
चित लागत नाहीं,
धीर धरत,
नाहीं,
सूनी,
पड़ी मोरी,
मन की डगरिया,
नाहीं बिसरत,
यादें,
भरम,
अब लौं,
छोड़ गये कैसे,
बीते कैसे,
उमरिया,
सहज,
सुभाऊ मोरो,
लाग लपेट नाहीं,
छल छिद्रयी,
दुनिया,
अंजाने,
आए पल,
ऐही अवसर पे,
मन लागत,
नाहीं,
मनहुँ,
उठत पीर,
सह न पाऊँ,
है मनोहर,
मुरलीधर,
मनमोहन,
पार लगाओ,
डगमग मेरी नैया,
कौन खैवईया,
भवसागर,
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर (म.प्र.)

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