आवाज़ लगानी चाहिए,,,
ये लौटकर वापिस आती हैँ!!
कई दिनों बाद.... महीनों बाद.... सालों बाद.... कभी -कभी... इस दुनियाँ से रुख़सत हो जाने के बाद भी ~
पर ख़तम नहीं होतीं!!!
ह्रदयतल से निकली हुई आवाज़ ~
पुकार गूंजती है...
प्रेम की पुकार... मदद की पुकार... करुणा की पुकार
अनंत आकाश में विचर फिर लौट आती है ~
पर ख़तम नहीं होतीं!!!
हमारे ह्रदय को कुशन लगातीं ~ङ
आह्लाद और मनुहार की आवाज़!!
जीने का संबल देतीं कही हुई अल्फाज़!!!
ये किसी के सिर्फ चले जाने से ख़तम नहीं हो जातीं ~
ह्रदय के पुकार की आवाज़!!!
✍ डॉ पल्लवी कुमारी"पाम "

0 टिप्पणियाँ