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बेरुखी दुनिया के दस्तूर सोच कर---

कभी हंसते है, कभी संजीदा हो जाते है,

बड़ी ही पेचीदा है--- 

इस दुनिया का चलन---

यह सोच कर अचंभित हो जाते है---

सभी के दिलों के अक्स पढ़ना नामुमकिन है,

जिंदगी के पथरीले रास्तों में---

गिरते हैं  ठोकर खाते हैं,

पग  पग की ठोकर से हम नहीं घबराते है---

लेकिन अपनी फितरत कुछ ऐसी है,

लिख लेते हैं एक अनुभव और---

जिंदगी की किताब में,

आगे बढ़ते हैं और मौन हो जाते हैं,

संगीता✍✍