इस कहानी का किसी भी पात्र या स्थान से कोई संबंध नही है!रूहानी एक काल्पनिक कहानी है!
पिछले भाग में आपने पढ़ा कि नितिन और स्वाति दोनों रूहानी की मुक्ति के लिए निकलते हैं और रास्ते मे उन्हें नितिन के दोस्त रॉकी और उसकी गर्लफ्रैंड तनु भी साथ चलने को तैयार हो जाते हैं!अब आगे-
वे चारों निकल पड़े हैं एक खतरनाक रास्ते पे,कोई नही जानता आने समय में क्या होने वाला है!रास्ते में नितिन खामोश सा गाड़ी चला रहा है तो रॉकी उससे पूछता है,क्या बात है,तू इतना खामोश क्यों है?
नितिन जवाब देता है,मैं ये सोच रहा था कि तुम दोनों को साथ नही आना चाहिए था!नितिन ने जवाब दिया!
क्यों म,तू ऐसा क्यों सोच रहा है?रॉकी नीतिन से हैरानी के साथ पूछता है!
वहाँ तुम दोनो की जान को खतरा हो सकता है रॉकी और मैं तुम्हारी जान खतरे में नही डाल सकता!नितिन कहता है!
रॉकी भी एक दम से जवाब देता है,दोस्त भी कहता है और पराया भी कर दिया!हमने तो तेरे साथ घूमने का प्रोग्राम बनाया था,लेकिन जब तूने नीलिमा की हालत का बताया तो सच मान,बहुत बुरा लगा उसके लिए!आगे आने वाले समय में ऐसा किसी ओर के साथ ना हो इसीलिए हम तेरी मदद करना चाहते हैं!बात रही तनु की तो वो मुझसे अलग थोड़े ही है!मैं तेरे साथ अपनी दोस्ती निभा रहा हूँ और वो मेरे साथ अपना प्यार!रॉकी उसे समझाता है!ऐसे ही चारों बातें करते नैनीताल की ओर बढ़ते हैं और शाम तक अपनी मंजिल पे पहुँच जाते हैं!
शाम को वो उसी स्थान पे पहुँचते हैं जहाँ पे नीलिमा के साथ ये हादसा हुआ था,उन्हें दूर दूर तक कोई नजर नही आता है तब वो गाड़ी में कुछ किलोमीटर आगे जाते हैं जहाँ उन्हें एक पुराने मन्दिर दिखता है,वे लोग वहाँ पहुँच जाते हैं!मन्दिर बहुत ही विशाल है और वहाँ पे भोलेनाथ की बड़ी सी मूर्ती लगी हुई है!वे चारो वहाँ माथा टेकते हैं और वहाँ के पुजारी से उस जंगल के बारे में पूछते हैं!पुजारी उन्हें बताता है कि पहले ये जगह बिल्कुल शान्त थी लेकिन पिछले बीस -पचीस सालों से यहाँ ऐसे हादसे होने लगे हैं!कमाल की बात ये है कि जो भी बुरी आत्मा ऐसा काम करती है वो सिर्फ पुरुषों को निशाना बनाती है!वो भी उन पुरुषों को जो किसी कुँवारी लड़की के साथ होते हैं!लड़कियों को तो एक खरोंच तक नही आती है!

ये बात सुनकर स्वाति कहती है कि इससे ये बात तो साफ हो गई कि खतरा सिर्फ नितिन और रॉकी को है!मुझे और तनु को वहाँ कोई खतरा नही!पुजारी से इजाजत लेकर वो चारो वहीं रुक जाते हैं!
रात का समय है,चारो भगवान का आशिर्वाद लेते हैं,पुजारी उन्हें प्रशाद देता है और उन्हें आशीर्वाद भी देता है!चारों के माथे पर भोलेनाथ की मंत्रित भस्म लगाता है और थोड़ी भस्म एक पोटली में डालकर देता है!अब स्वाति आगे आती है और तीन लाल रंग के धागे निकाल के उन तीनों को देती है!स्वाति उन्हें कहती है कि ये धागे मेरे पिताजी ने दिये हैं उस चुड़ैल से रक्षा करने के लिए!वो तीनों वो धागे पहन लेते हैं!बिल्कुल वैसा धागा स्वाति के गले मे भी है!वो चारों रात को उसी रास्ते पे निकल पड़ते हैं!
चारों का मन अब डर से भरा हुआ है!तभी स्वाति चुप्पी तोड़ते हुए कहती है कि देखो अगर किसी के मन मे भी यहाँ आने का पछतावा है तो वो अभी भी वापिस जा सकता है!वो मन्दिर में रुक सकता है और वापिसी में हम उसे अपने साथ ले जा सकते हैं!तभी नितिन गुस्से में बोलता है क्यो एक तुम ही बहादुर हो क्या हम सबमे?अगर तुम अपनी दोस्त की हालत का बदला लेने आई हो तो मुझे भी अपने सबसे अच्छे दोस्त सचिन की मौत का बदला लेना है!तभी रॉकी कहता है मौजमस्ती अपनी जगह है लेकिन जहाँ अपना दोस्त खतरे में हो वहाँ हम अपनी जान भी दे सकते हैं!तनु भी उनकी हां में हां मिलाती है!चारों उसी जगह पहुँच जाते हैं जहाँ नीलिमा बेहोश मिली थी!
नितिन कहता है कि पुजारी जी ने तो यही जंगल बताया था लेकिन यहाँ तो सब शांत है!उनकी गाड़ी घने जंगल मे दौड़ रही थी!लेकिन वो इस बात से अंजान थे कि रूहानी की नजरों से इस जंगल मे कुछ नही बच पाया कभी!रूहानी उन्ही की गाड़ी की डिक्की में बैठी थी!

थोड़ी आगे जाकर नितिन को लगता है जैसे गाड़ी उसके कट्रोल से बाहर हो गई हो,वो चाह कर भी ब्रेक नही लगा पा रहा था!नितिन घबरा कर बोला,ये नई गाड़ी की ब्रेक कैसे फेल हो सकती है!वो चारो घबरा जाते हैं!तभी उन्हें गाड़ी में हँसने की बहुत भयानक आवाज आने लगती है!वो समझ जाते हैं कि रूहानी उन्ही की गाड़ी में बैठी है!नितिन गाड़ी का संतुलन खो बैठता है और गाड़ी एक पेड़ से टकरा जाती है!लेकिन किसी को ज्यादा चोट नही आती है!रूहानी उनके आगे आकर खड़ी हो जाती है और चिल्लाकर बोलती है,मैं हूँ रूहानी,इस जंगल की महारानी!तुमने क्या सोचा कि मेरी नजरों से बचकर निकल जाओगे!नही हो सकता ये!हा-हा-हा,नही बचोगे मुझसे!

स्वाति थोड़ी हिम्मत दिखाती है और आगे आ कर रूहानी से पूछती है,हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?जो तुम हमे मारना चाहती हो!
रूहानी बोलती है,तू चली जा लड़की,इस लड़की को भी लेजा!मुझे तो सिर्फ इन दो मर्दो से बदला लेना है!
स्वाति कहती है क्यों,इन दोनों ने ऐसा क्या किया है जो तुम इन्हें मारना चाहती हो?पहले हमें बताओ सब?
रूहानी गुस्से में कहती है कि क्योंकि यही मेरे दुश्मन है!ये कहके वो रॉकी की तरफ बढ़ती है कि तभी बीच में नितिन आ जाता है!उसे देखकर रूहानी की आँखों से खून के आँसू बहने लगते हैं!वो पागलों की तरह रोने लगती है!वो नितिन को कहती है कि तू????आखिर तू आज आ ही गया ना?मैं जानती थी मेरा सालों का इंतजार बेकार नही जा सकता!नितिन उसकी बातें सुनकर बोलता है,कौन हो तुम?मैं तो तुम्हें जानता भी नही!
रूहानी ये बात सुनकर ओर भी गुस्से में आ जाती है और कहती है कि तू मुझे नही जानता पापी या ये कह कि मैं तुझे कभी नही जान पाई!लेकिन आज मैं तुझसे हर बात का बदला लूंगी!ये कहकर वो बाकी सब को भूल जाती है और नितिन की ओर बढ़ती है!लेकिन जैसे ही वो नितिन को उसकी गर्दन से पकड़ने लगती है,तो उछल कर दूसरी ओर गिरती है!स्वाति नितिन को कहती है नितिन तुम्हारे गले मे अभिमंत्रित धागा है इसीलिए ये तुम्हे हाथ नही लगा पाई!
वो चारों दौड़ कर कार में आकर बैठ जाते हैं!तनु उस चुड़ैल को देख कर इतना घबरा जाती है कि कार में बैठते ही बेहोश हो जाती है!रूहानी अब गुस्से में उनकी कार की छत पे चढ़ जाती है और कहती है कि आज मैं तुझे किसी कीमत पे नही जाने दूँगी!अब स्वाति उन तीनों को कार में ही रहने को कहती है और खुद बाहर आती है!वो रूहानी से कहती है कि तुम्हे इन लड़को को ही क्यों मारना है!मुझे ये जानना है!
तब रूहानी कहती है कि नही मुझे ओर किसी लड़के को नही मारना,मुझे सिर्फ इसी को मारना है जो गाड़ी चला रहा है!उसके बाद मैं हमेशा के लिए यहाँ से चली जाऊंगी!
आखिर रूहानी सिर्फ नितिन को ही क्यों मारना चाहती थी?ये जानने के लिए देखिए रूहानी का अगला भाग!
हर हर महादेव
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