देव,मै कैसे विवाह कर सकता हूं।" हनुमान जी ने सूर्यदेव से ये सवाल पूछा?
सूर्यदेव ने कहा " हनुमान तुम मेरे उत्कृष्ट शिष्य हो,लेकिन अविवाहित होने कि वजह से मैं तुम्हे सिर्फ पांच विद्याएं ही सिखा सकता हूं,मै नियम बद्ध हूं।" नौ विद्याओं में सिर्फ पांच_ क्यों गुरुदेव? " हनुमान ने पूछा।

वत्स तुम ब्रह्मचारी हो,और बची चार विद्याएं सिर्फ विवाहित ही सीख सकते है_ सूर्यदेव ने उत्तर दिया।
इसका उपाय _ हनुमान जी ने प्रश्न किया?
आप जानते हो मै गृहस्थ जीवन ग्रहण नहीं कर सकता।
बहुत सोच विचार के बाद सूर्यदेव ने रास्ता निकाला।उन्होंने अपनी रूपवती पुत्री सुवर्चला से विवाह की सलाह दी,और कहा कि यह विवाह सिर्फ जगत कल्याण हेतु है।इससे तुम्हारे ब्रह्मचर्य में कोई असर नहीं पड़ेगा।
हनुमान जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया ।विवाह हुआ,और हनुमान जी की सारी विद्याएं सीखने कि बाधा खत्म हुई।
सुवर्चला विवाह के बाद तपस्या में लीन हो गई।
आज उन दोनों का युगल मंदिर तेलंगाना के खम्माम जिले में अवस्थित है।जहां दर्शन करने से पति पत्नी के बीच चल रहे तनाव संबंधों से मुक्ति मिलती है।
( संदर्भ_पाराशर संहिता)