दीपक की लौ
अंधतमस मिटा
आभा फैलाये
स्याह रातों में
उम्मीद का किरण
जगमगाये
दीपक स्वयं
ज्वलित होकर दे
उज्जवलता
दीपक की लौ
संदेश दे जग को
बनो निस्वार्थी
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

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