जाने कब से इंतज़ार थीं इस पल की मेरे दिल को
खबर आयी हैं की आने वाले हैं वो मुझसे मिलने को
सुनकर ही मन में प्यार की लहर उठ रही दिल में
जाने कब से थीं बेकरार मैं भी उनसे मिलने को.......

रोज़ पूछा करते हो ना राज़े मेरे होठों की मुस्कान की वजह
ए हवा आज चुप क्यूँ हैं तू जब मिलने वाली हैं तुझे हर जवाब
प्यार की हद आज तु भी देखेगा मेरे दीवाने महबूब की
जिनके लिए कबसे थीं बेकरार मैं भी रूबरू होने को......


आज जी भर के बहक जा ए मेरी आँखों की काजल
आज हवा भी नहीं उड़ा पायेगा ऐसी बांन्धुगी अपनी आँचल
झूमेगी दीवानी होके आज बेपरवाह होकर मेरी पैरो की पायल
जाने कबसे खामोश थीं साजन के नाम से छनकने को........


ऐ दिल आज तू अपने अंदाज़ में धड़क अपने धड़कन के नाम
आज मधु रंगी हैं अपने प्यारे महबूब की प्यार के नाम
गुज़ारिश हैं तुमसे ऐ मौसम-ए-बहार आज इतनी रहम करना
कोई मुश्किल ये रुकावट से बचाये रखना जो आरहे हैं अपनी नैना से मिलने को
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