बे-खुदी में भी बस तेरा ही ख्याल रहता है.....

तुम से बिछड़ के जिंदा हूं,यही मलाल रहता है....

सहरा की तिश्नगी सी लगने लगी है जिंदगी......

उसपर तेजाबी अश्कों का भी बवाल रहता है....

मेरे दिल का दर्द है तू , और दवा भी तू ही.....

ले ले कर नाम तेरा, दिल मेरा निढा़ल रहता है.....

खबर है मुझे, तू रफ्ता-रफ्ता भुलाने लगा है.....

हर्फ हर्फ मेरे नाम का दिल से मिटाने लगा है.....

खता क्या है मेरी , बस यही सवाल रहता है.......

बे-खुदी में भी बस, तेरा ही ख्याल रहता है.......

.......✍️ पिंकी मिश्रा