मंद-2 चल रही है पुरबैया , मानों उड़ रहा है प्रकृति का आँचल।।

बीत गई रैना अपने छोड़ कर दो नैना।।
लेकर आ गयी फिरसे ख़ूबसूरत मनमोहक नज़ारा।।

चिड़ियों की चहचहाहट ,गुंजन करता वृक्षों का झुरमुट सारा।।।

ओढ़ कर बरसाती चादर, लेकर उमस का तूफ़ान।।

लो फिरसे आ गया मानसून अब संभालो अपने को मेरी जान।। 

एकता श्रीवास्तव