धरा और अम्बर मौन
जीवन का परिवर्तन है मौन।
सत्य की गति भी मौन
प्रकृति का नियम है मौन।
मन और तन  
संतान भी मौन
मौन रहेगी।
जीवन का हर क्षण है मौन।
राधे कृष्ण भी मौन
दोनों का प्रेम है मौन।
भक्ति और भक्त भी मौन
भगवन् की शक्ति है मौन।
प्रिय और प्रियतम भी मौन
एक दूजे के बीच का प्रेम है मौन।
शिव और शिवा भी मौन
प्रकृति है मौन।
समय और दिशाएं मौन
धरती मां की संतान मौन है।
पर्वत, नदियां मौन
मानव की मानवता है मौन।
हम, तुम दोनों मौन
मानव का अन्तःस्थल है मौन।
कबतक   मौन रहेगी मनुष्य की मानवता।

अर्चना पांडेय,, आर्ची